मां और पत्नी में कौन है ज्यादा महत्वपूर्ण? क्या आपके सामने भी आती हैं इस तरह की परेशानी मां और पत्नी में किसे चुनें? क्या आपके भी सामने है ये जटिल सवाल, तो यहां जानें इसका जवाब

न्यूज़ट्रेंड एंटरटेनमेंट डेस्क: शादी एक ऐसा बंधन जिसमें दो लोग पूरी लाइफ एक-दूसरे के साथ बिताने की कस्में खाते हैं। एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहने का वादा करते हैं। लड़की के लिए शादी एक ऐसा रिश्ता होता है जिसे निभाने के लिए वो अपने परिवार को छोड़कर एक नए परिवार का हिस्सा बनती हैं और उस परिवार को अपना बनाती है। बात हिंदु संस्कृति की जाए तो इसमें शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों का भी मिलन होता है।

शादी के बाद सबसे ज्यादा परेशानी जिस रिश्ते में आती है वो होती है पत्नी और मां के बीच का रिश्ता। शादी के वक्त हर कोई लड़के को यही बोलता है कि शादी के बाद मां को मत भूल जाना। शादी के बाद एक लड़के के लिए अपनी मां और पत्नी के बीच तालमेल बिठाना और दोनों को बराबरी की महत्ता देना लड़के के लिए काफी परेशानी भरा होता है। बता दें कि लड़के के सामने परेशानी तब आती है जब उसकी मां और उसकी पत्नी का तालमेल अच्छा ना हो, ऐसे में लड़का उसका साथ दें जिसने उसने बचपन से उसको पाल-पोषकर बड़ा किया हो या उस लड़की का जो उसके लिए अपना परिवार छोड़कर आई हो।

शादी के बाद एक चीज और जो परेशान करती है वो होती है टाइम, मां को लगता है कि शादी के बाद उसका बेटा उसे समय नहीं देता है। ऐसे में आपको पत्नी और मां दोनों को समय देने के लिए तालमेल बिठाना होगा। वैसे लोगों के मन में ये जो धारणा है की शादी के बाद लड़के बदल जाते हैं या वो अपनी मां से ज्यादा अपनी पत्नी को टाइम देते हैं ये बिल्कुल गलत हैं। क्योंकि किसी भी लड़के के जीवन में मां और पत्नी दो ऐसी महिलाएं होती हैं जिसमें से वो किसी एक को ज्यादा और किसी को कम महत्ता नहीं दे सकते हैं। इसलिए इन दोनों को कभी भी अक तराजू  पर रखने की कोशिश करना भी गलत है।

अब यहां पर सवाल यह उठता है कि पत्नी और मां के बीच संतुलन की जरूरत क्या है? तो उसका जवाब हम आपको देते हैं।

बता दें कि यदि कोई पति अपनी पत्नी को ज्यादा वक्त देता है तो इसमें कोई गलत बात नहीं हैं क्योंकि वो लड़की अपने घर से दूर आपकी जिंदगी में आती हैं और ऐसे में उससे रिश्ता मजबूत करने के लिए आपको उसे समय देना जरूरी हो जाता है। बात जब अरेंज मैरिज की आती है ऐसे में आपको उसके साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने के लिए उसे समय देने की और जरूरत पड़ती है। ऐसे में इस बात को बिल्कुल भी गलत नहीं समझना चाहिए।

ऐसा कई बार होता है जब पति अपनी पत्नी को सपोर्ट करना शुरू कर देता है तो ऐसे में लोगों के मन में ये भावना पैदा होने लगती है कि वो जोरू का गुलाम हो गया है। लेकिन ये धारणा पूरी तरह से गलत होती है।

आपको ध्यान देना होगा कि अपनी पत्नी के साथ आपको अपनी मां का भी पूरा ध्यान रखना होगा और उनकी देखभाल करनी होगी। ताकि उनके मन में ऐसा ना आए कि वो उनको इग्नोर कर सारा ध्यान अपनी पत्नी पर ही दे रहा है। और इन्हीं सबके चलते पारिवारिक ताना बाना बिखरने लगता है। ऐसे में यह बात समझनी जरूरी है कि मां की और पत्नी की जगह अलग-अलग होती है।

बता दें कि मां और पत्नी के बीच चुनाव कभी नहीं हो सकता है और ना ही इसकी कोई जरूरत होती है। हालांकि प्रतिस्पर्धा की भावना की वजह से कई भावनात्मक और मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं। लेकिन एक बात जो हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए वो ये है कि पत्नी आपके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा होती है जो पूरी जिंदगी आपसे  साथ बिताने वाली होती है। ऐसे में उसे आपके सहारे और वक्त की जरूरत होती है।