दाल-चावल खाता था ये मगरमच्छ, गांव वालें बच्चों की तरह करते थे उसकी देखभाल, जानें गंगाराम की पूरी कहानी इस मगरमच्छ के मरने पर पूरे गांव में नहीं जला था चूल्हा, सबका रो-रो कर था बुरा हाल

न्यूज़ट्रेंज वेब डेस्क: मगरमच्छ पानी में रहने वाला एक विशालकाय और खतरनाक सरीसृप है। मगरमच्छ का ख्याल दिमाग में आते ही डर से रूंह काप जाती है। पानी में रहने वाला ये मासांहारी जानवर काफी खूखांर होता है। प्रवृत्ति से शिकारी किस्म का ये मगरमच्छ इंसान को कच्चा निगल जाता है। लेकिन आपने कभी सुना है कि कोई मगरमच्छ दाल-चालव खाता हों। लोगों के साथ घुल मिलकर रहता हो, सुनकर अचम्भा हो रहा होगा ना लेकिन ये बिल्कुल सच है। आज हम आपको एक ऐसे मगरमच्छ के बारे में बताएंगे जो शाकाहारी हैं। इस मगरमच्छ का नाम गंगाराम है।

ये घटना छत्तीसगढ़ के बेमेतरा बावमोहरा गांव की है। जहां के तालाब में ये मगरमच्छ रहता था। गांव वालें उसका वैसे ही ख्याल रखते थे जैसे लोग अपने बच्चों का रखते हैं। गंगाराम पूरे दिन तालाब के किनारे पड़ा रहता था। यहां तक की वो इतना समझदार था कि जब गांव वाले उस तालाब में नहाने जाते थे तब वो कहीं दूर चला जाता था। उसने कभी भी किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया। गांव वाले हर रोज उसके लिए दाल चावल बनाकर लाते थे और गंगाराम बड़े प्यार से खाता था। गंगाराम 180 साल का हो गया था तब उसकी मृत्यु हो गई।

गंगाराम की मृत्यु से पूरे गांव में मातम पसर गया था, उस दिन गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला था। उसके जाने के बाद सभी गांव वाले काफी दुखी थे। गंगाराम का पोस्टमार्टम करके उसके शरीर को गांव वालों को सौंप दिया गया था। गांव वालों ने उसका अंतिम संस्कार उसी प्रकार किया जैसे किसी इंसान का किया जाता है। उस पर फूल माला चढ़ाए गए। जिसके बाद गांव वालों ने फैसला लिया कि उसके नाम का एक मंदिर बनेगा, जिसमें उसकी पूजा की जाएगी।

बता दें कि ये सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा कि आखिर कैसे कोई खूंखार जानवर ऐसा हो सकता है। जो दाल-चालव खाता हो, शाकाहारी हो साथ ही इतना समझदार की किसी गांव वाले को आज तक उसने नुकसान नहीं पहुंचाया। उसके जाना गांव वालों के लिए अपने किसी परिवार के सदस्य के खोने समान था। हालांंकि ये बात थोड़ी अजीब है लेकिन सच भी कि प्यार किसी को भी बदल सकता है। ये गांव वालों के प्यार का ही नतीजा था कि गंगाराम ने कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।