नेहरू ने की थी ये 3 बड़ी गलतियां, जिसकी सजा आज भी भुगत रहा है भारत नेहरू ने की थी 3 बड़ी ग़लतियाँ , जिस का खामियाज़ा आज भी चुका रहा है भारत

कहा जाता है कि इतिहास में लिया गया एक सही फैसला आपकी किस्मत को पलट देता है, तो वहीं गलत फैसले का खामियाजा आपको लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। ऐसा ही कुछ कश्मीर के साथ भी हुआ है। कश्मीर में जो आज परेशानी है, वह सिर्फ भारत के प्रथम पीएम नेहरू की ही देन है। पूर्व पीएम नेहरू के गलत फैसले की वजह से आज देश में कश्मीर का मुद्दा उलझा हुआ है और उसकी वजह से न जाने कितने जवानों को शहादत देनी पड़ी, लेकिन यह मामला अभी तक ठंडा नहीं हो पाया है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

बताया जाता है कि कश्मीर के महाराजा ने बिना किसी शर्त के अपनी रियासत का भारत में विलय का प्रस्ताव कर दिया था, लेकिन उस समय नेहरू ने उस प्रस्ताव पर शेख अब्दुल्ला की सहमति को ज़रूरी बताया। अगर पंडित नेहरू उस प्रस्ताव को मान लेते तो शायद आज कश्मीर की समस्या हमारे सामने मौजूद न होती। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों की माने तो कश्मीर से जुड़ी सारी परेशानियां पंडित नेहरू के शासनकाल से ही चली आ रही है, जिसका अंत कब होगा और किसके शासन में होगा। यह कहा जाना भी मुश्किल है। ऐसे में हम आपको नेहरू के तीन गलत फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं।

नेहरू के तीन गलत फैसले

आजादी के समय भारत में करीब 600 रियासतों के विलय के लिए नये नियम बनाए गये थे, जिसमें से करीब दर्जन भर रियासतों को छोड़ कर सरदार पटेल की इच्छा से भारत में विलय में हो गया था, लेकिन कश्मीर रियासतों का मुद्दा बतौर प्रधानमंत्री नेहरू ने अपने पास रखा और तभी से नेहरू के तीन बड़े गलत फैसलों का खामियाजा आज तक देश भुगत रहा है –

1. कश्मीर के मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना

नेहरू खुद कश्मीर का मुद्दा यूएन में लेकर चले गये, जहां इस बात का फायदा पाकिस्तान को मिला और आज भी यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में अटका हुआ है और हर साल इस पर बातचीत होती है। इतना ही नहीं, हर बार संयुक्त राष्ट्र में भारत को इस मुद्दे पर शर्मिंदा भी होना पड़ता है और यह मुद्दा अभी तक शांत नहीं हो पाया है।

2. सन् 1948 में भारत और पाकिस्तान की जंग में सीजफायर का एलान करना

सन् 1948 में जब भारत और पाकिस्तान में युद्ध हुआ तो भारतीय सेना पाकिस्तानियों को खदेड़ने में सफल रही थी और भारतीय सेना ने बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इतना ही नहीं, युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार मिली थी और बलूचिस्तान के सभी कबायली समूहों की संसद (जिरगा) ने प्रस्ताव पास किया था कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं, लेकिन तभी अचानक से पंडित नेहरू ने सीजफायर का एलान कर दिया, क्योंकि वे शांति का माहौल चाहते थे।

3. आर्टिकल 370 के तहत कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देना

अगर नेहरू उस समय कश्मीर के महाराजा का प्रस्ताव मान लेते तो आज कश्मीर का विवाद ही नहीं होता और भारत के सभी नियम कानून कश्मीर में लागू होते। ऐसे में नेहरू ने उस समय प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और कश्मीर को एक विशेष राज्य की दर्जा दे दिया, जिसके बाद से ही वहा 370 लागू हुआ और आज भी उसकी लड़ाई जारी है।