एक साथ निकली 9 दोस्तों की अर्थी, मंजर देख कर कोई नहीं रोक पाया आंसू कहते हैं मौत जब आती है तो वह समय या फिर माहोल नहीं देखती और बस एक ही झटके में हँसते खेलते परिवार की खुशियाँ उजाड़ कर रख देती है. हालाँकि जन्म और मौत हम मनुष्यों की जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं..

कहते हैं मौत जब आती है तो वह समय या फिर माहोल नहीं देखती और बस एक ही झटके में हँसते खेलते परिवार की खुशियाँ उजाड़ कर रख देती है. हालाँकि जन्म और मौत हम मनुष्यों की जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं. इसलिए शायद हर कोई इस बात से वाकिफ रहता है कि एक ना एक दिन उसे इस दुनिया को छोड़ कर जाना ही पड़ेगा. परंतु कईं बार हालात ऐसे रुख मोड़ लेते हैं कि हमारी सोच से भी बुरी मौत हमारे रास्ते में खड़ी होती है. कुछ ऐसा ही हादसा गुजरात के कच्छ में देखने को मिला. यहाँ 9 युवकों की एक साथ मृत्यु ने पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया. यह सभी युवक दोस्त थे और कार से मकर संक्रांति का त्यौहार मनाने जा रहे थे. लेकिन तभी एक एक्सीडेंट ने उन सभी की जान ले ली.

हालाँकि, इस बात को पूरा एक महीना बीत चुका है लेकिन अभी भी कच्छ के मोटा गुंदाणा गांव में मातम का माहोल छाया हुआ है. एक साथ 9 परिवारों के बेटे जाने से कोई भी गाँव वाला अपने आंसू बहने से नहीं रोक पाया. दरअसल, कईं बार हमारी जिंदगी में ऐसे हादसे हो जाते हैं जो इंसान की जिंदगी को हिला कर रख देते हैं. वहीँ इन दोस्तों के वाकया के बाद किसी भी व्यक्ति को उनके जाने का यकीन नहीं हो पा रहा था. गौरतलब है कि इन सभी लड़कों के शव के साथ साथ उनके मोबाइल फोन भी बरामद किए गए. जब उनकी जांच की गई तो हादसे के दिन की उनकी कईं सेल्फियाँ प्राप्त हुई. इन सभी युवकों ने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि यह सेल्फी उनकी आखिरी सेल्फी बन कर रह जाएगी. तस्वीरों में सभी लड़के बेहद खुश नजर आ रहे थे.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि यह पूरा मामला गुजरात के कच्छ का है. जहाँ मकर संक्रांति पर मोटा गुंदाणा गाँव के 9 युवक अपनी कार से घर से बाहर घूमने के लिए निकले थे. जब वह लोरिया गाँव के पास पहुंचे तो अचानक से उनके सामने एक निजी बस आ गई. बस की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि गाड़ी चलाने वाला युवक कंट्रोल खो बैठा और जिसके कारण उनकी टक्कर उस बस से हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सभी युवकों की मौत मौके पर ही हो गई.

इन सभी युवकों के शव जब पुलिस द्वारा गाँव में लाये गए तो उनके परिवार वालों की हालत देख कर गाँव वालों की हिम्मत ने जवाब दे दिया. नौ परिवारों के वंश को आगे बढाने वाले युवकों की लाश सामने देख कर हर कोई घुटने टेक बैठा था और चाह कर भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था. इन युवकों में से 6 युवक अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थे. ऐसे में इनके माता पिता पर क्या बीती होगी, यह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. मिली जानकारी के अनुसार मृतक युवकों में से हार्दिक बांभरोलिया नामक युवक की शादी उसी महीने में होने वाली थी. लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था.घटना के एक माह के बाद भी गाँव वाले इस एक्सीडेंट को भुला नहीं पाए हैं.