मार्च से बंद हो सकते हैं देश के 1.13 लाख से ज्यादा ATM, महंगा हो जाएगा लेनदेन

अगर आप एटीएम कार्ड यूज करते हैं और ज्यादातर लेनदेन उसी से करते हैं, तो यह खबर आपको झटका दे सकती है। जी हां, 1 मार्च से देश के आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो सकते हैं,  जिससे कैश की किल्लत हो सकती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि कई एजेंसियों का दावा है। आधे से ज्यादा एटीएम बंद होने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं, जिसकी वजह से थोड़ा अफरा तफरी का भी माहौल पैदा हो सकता है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

देशभर में सभी बैंकों व व्हाइट लेबल एटीएम को संचालित करने वाली संस्था कैटमी का दावा है कि 1 मार्च से आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो सकते हैं। हालांकि, इसे रोकने के लिए कैटमी ने सरकार और आरबीआई को एक सुझाव भी दिया है, लेकिन इस पर दोनों ही राजी नहीं हो रहे  हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 1 मार्च से देश के आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो जाएंगे, जिससे कई लोगोंं की नौकरियां चली जाएंगी और देश में कैश की किल्लत होगी, जिससे एक बार फिर से नोटबंदी जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं।

बन सकते हैं नोटबंदी जैसे हालात

कैटमी का दावा है कि यदि सरकार और आरबीआई इस मसले का हल निकालने में असफल रही तो एक बार फिर से देश में नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। कैटमी का कहना है कि एटीएम कंपनियां धीरे-धीरे इनकी संख्या में कमी कर रहे हैं क्योंकि इनको चलाने में घाटा हो रहा है, ऐसे में फिलहाल छोटे शहरो के एटीएम को बंद किया जा रहा  है, लेकिन बाद में बड़े शहरो के एटीएम को भी बंद किया जा सकता है। और अगर बड़े शहरों के एटीएम को बंद किया गया तो लोग बैंको के बाहर लंबी लंबी कतार लगाकर खड़े रहेंगे और इससे नोटबंदी के हालात पैदा होंगे।

1.13 लाख लोग हो जाएंगे बेरोजगार

कैटमी ने आगे कहा कि यदि कंपनियां एटीएम बंद कर देंगी, तो देश के 1.13 एटीएम बंद हो जाएंगे। और इन सभी  एटीएम में एक व्यक्ति ज़रूर होता है, ऐसे में 1.13 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे, जिससे बेरोजगारी की दरें भी बढ़ जाएंगी और सरकार एक बार फिर से बेरोजगारी के मुद्दे पर घिर जाएगी और अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सीधे सीधे लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा, जोकि बीजेपी के लिए किसी भी कीमत में अच्छा नहीं है।

महंगा हो सकता है लेनदेन

कैटमी ने इस मसले से उबरने के लिए सरकार और बैंक को यह सलाह दी है कि एटीएम से लेनदेन के शुल्क को बढ़ाया जाए, ताकि कंपनियों का नुकसान का भरपाई हो सके। हालांकि, अभी सरकार और आरबीआई से इस मसले पर कोई भी बातचीत नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि कैटमी की यह सलाह मान ली जाएगी, ताकि भारी नुकसान और अफरा तफरी से लोगों को बचाया जा सके।