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एक बेटा प्रोफेसर तो दूसरा फैक्ट्री का मालिक, फिर भी बुजुर्ग बाप चौकीदारी करने को है मजबूर

माता-पिता चार बेटों को रख सकते हैं लेकिन चार बेटे माता-पिता को नहीं रख सकते. ये बात आपने खूब सुनी होगी लेकिन अब ये सब होता भी है और ये पीड़ा बहुत तकलीफ देती है जिन औलादों को जन्म दो वो ही आखिरी समय में सहारा बनने के बजाए साथ छोड़ देती हैं. माता-पिता जिस बच्चे के लिए अपना पेट काटकर उनका पेट भरते हैं उनकी परवरिश करते हैं लायक बनाते हैं समय आने पर वो ही बच्चे अपने माता-पिता को लात मार देते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ यूपी के रहने वाले श्रीराम दांगी के साथ जिनके चार बेटे हैं और चारों अच्छी जगह कमाते हैं फिर भी इस उम्र में चौकीदारी करने मजबूर हैं ये बुजुर्ग, इनके चारों बेटों की अच्छी-खासी इनकम है लेकिन फिर भी वो अपने बूढ़े पिता को रखना नहीं चाहते. फिर बुजुर्ग ने उठाया वो कदम जो कोई पिता नहीं करना चाहता.

फिर भी इस उम्र में चौकीदारी करने मजबूर हैं ये बुजुर्ग

आज हम आपको एक ऐसे बुजुर्ग के बारे में बता रहे हैं जिसने अपने बेटों को लायक बनाने में अपनी पूरी जिंदगी झोंक दी और अब जब बेटे लायक बन गए और उन्हें उम्मीद हुई कि अब वो बेटे कुछ कर के दिखाएंगे. मगर अब वो चौकीदारी करके अपना पालन-पोषण कर रहे हैं. ये खबर है एशबाग स्टेडियम के पास स्थित जगनन्नाथ की गली नबंर दो में रहने वाले श्रीराम दांगे की.

श्रीराम के पहले बेटे शिवराज सिंह निवासी डी-19 मुस्कान परिसर अयोध्या बायपास मिलेट्री से रिटायर हुए हैं और अब अमरावती में प्राइवेट नौकरी करते हैं और हर महीने 95 हजार रुपये की सैलरी मिलती है. बुजुर्ग आदमी के दूसरे बेटे ओमप्रकाश सिंह निवासी वीआईपी बाजार, सागर में रहते हैं और वहां पर कोचिंग चलाते हैं इसके साथ ही इंदौर में वेल्डिंग रॉड की फैक्ट्री भी चलाते हैं, जिसमें हर महीने 50 हजार रुपये आय होती है. श्रीराम के तीसरे बेटे रामबाबू सिंह निवासी मेरूखेड़ी पोस्ट सोजना गुलाबगंज विदिशा में रहते हैं और वहां पर इनकी 80 बीघा जमीन, ट्रैक्टर और एक मकान है, इनकी आय महीने की 50 हजार रुपए. श्रीराम के चौथे बेटे रामजीराम सिंह निवासी अयोध्या बायपास में एक प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर हैं और इनकी सैलरी 30 हजार रुपये हर महीने है. मगर इनमें से कोई भी अपने पिता को रखना नहीं चाहता.

बुजुर्गों को हर महीने मिलनी चाहिए ये राशि

हृदय रोग और डायबिटीज से पीड़ित श्रीराम को अपनी आर्थिक स्थिति को चलाने के लिए चौकीदार की नौकरी करने पर मजबूर हो गए. उन्होंने पिछले दिनों अपने भरण-पोषण की राशि के लिए शहर की एसडीएम वंदना जैन से आवेदन किया. इस केस पर सुनवाई करते हुए एसडीएम जैन ने गुरुवार को चारों बेटों को बुलाया और उन्हें कुल 10 हजार रुपये महीना भरण-पोषण देने का आदेश दिया. इस आदेश का उल्लंघन करने वाले चारों बेटे को जेल भेजने जैसी कार्यवाही की जाएगी. अब ना चाहते हुए भी चारो बेटों को अपने पिता का हक जरूर देना होगा और ऐसा नहीं किया तो जेल जाने की तैयारी भी करनी होगी.

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