जानिए कब प्रधानमंत्री मोदी ने बचाई थी जयललिता की जान और किया था सावधान!

लम्बे समय से बीमार चल रही जयललिता का सोमवार रात 11:30 बजे निधन हो गया। इस खबर से पूरा देश शोक में डूबा हुआ है, और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है। इस खबर से अम्मा के समर्थकों को काफी गहरा धक्का लगा है। आज इनको सभी लोग अपने-अपने तरीके से याद कर रहे हैं। आज हम आपको इनसे जुड़ी एक बहुत पुरानी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं।

जयललिता को दिया जा रहा था धीमा ज़हर:

यह बात तब की है जब 2011 में उन्हें मारने की कोशिश की जा रही थी। उस समय उन्हें खाने में थोड़ा-थोड़ा ज़हर दिया जा रहा था। यह केवल एक इत्तेफाक ही था की किसी अनहोनी के पहले ही इस बात का पता चल गया। ज़हर के कारण जयललिता धीर-धीरे कमजोर होने लगी थी, उनकी तबियत अक्सर ख़राब रहने लगी। उन्ही दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी (जो वर्तमान के प्रधानमंत्री हैं) जयललिता से मिलने उनके घर ‘पोएस गार्डन’ गए हुए थे। मोदी ने उस समय ही उन्हें कुछ गुप्त बातें बताई थीं, जिस वजह से उस समय उनकी जान बच गयी थी।

नरेन्द्र मोदी ने हो रहे धोखे से किया था सावधान:

जब मोदी जयललिता से मिले तो उन्होंने जयललिता को यह बताया कि तमिलनाडु के कुछ कारोबारी गुजरात में निवेश करने के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। वह यह सब इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि आपकी सहयोगी शशिकला नटराजन और उनके लोग उनसे अवैध रूप से वसूली कर रहे हैं। यह सुनकर जयललिता के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उनको इस बात का ज़रा भी यकीन नहीं था कि उनकी सबसे करीबी महिला उनके साथ ऐसा कर सकती है। बाद में इस बात का खुलासा तहलका पत्रिका ने भी किया था।

जयललिता के बिगड़ते हुए सेहत के बारे में भी बताया:

मोदी ने जयललिता से उनकी बिगड़ती हुई हालत के बारे में भी बात की, मोदी ने यह देखा कि जयललिता का चेहरा नीला होता जा रहा है। उन्होंने खान-पान पर ध्यान रखने के बारे में भी सलाह दिया। मोदी से मिलने के बाद जयललिता बहुत सावधान रहने लगीं और आपने काम से लेकर अपने खाने, हर जगह जयललिता ने कड़ा पहरा बिठा दिया। यह सब होने के बाद एक बार जयललिता ने अपने एक करीबी डॉक्टर से अपने सेहत की जाँच करवाई, उसके यह बात साफ़ हो गयी कि कोई उन्हें धीमा ज़हर दे रहा है।

शशिकला के कहने पर नर्स ही दे रही थी धीमा ज़हर:

जाँच के दौरान यह बात साफ़ हो गयी कि ज़हर कोई और नहीं बल्कि उनकी नर्स ही मिला रही थी। यह एक तरह का सेडेटिव रसायन था। इसको खाने से शरीर में सुस्ती और नींद की समस्या हो जाती है और इसको लगातार खाने से धीरे-धीरे मौत भी हो जाती है। इससे होने वाली मौत पर लोग यही समझते कि वह कोई दवा ले रही थीं। जो नर्स उनके खाने में ज़हर मिला रही थी, उसे उनकी मित्र शशिकला ने ही काम पर रखा था। नर्स ने बाद में यह स्वीकार किया कि उसे यह काम शशिकला ने ही करने के लिए कहा था।

आखिरी वक़्त में जयललिता के साथ थीं शशिकला:

सूत्रों द्वारा बाद में यह भी बात सामने आयी कि शशिकला, जयललिता को मारकर अपने पति नटराजन को सत्ता दिलाना चाहती थीं। जब इस बात का खुलासा हुआ तब जयललिता ने शशिकला और उसके परिवार को अपने घर एवं पार्टी से निकाल दिया। हालांकि शशिकला दोस्त थीं, इसलिए जयललिता ने कोई केस नहीं किया। बताया जाता है कि इस घटना के 3 महीने बाद शशिकला और उसके परिवार ने जयललिता से माफ़ी माँग ली थी, जिसके बाद जयललिता ने उन्हें माफ़ कर दिया था। इसके बाद शशिकला के पास वह ताकत नहीं रह गयी, लेकिन वह जयललिता की ख़ास तब भी थीं। आखिरी समय में हॉस्पिटल में जयललिता के साथ कुछ गिने चुने लोगों के साथ शशिकला भी थीं।

जयललिता ने अपने सांसदों को दिए थे कड़े निर्देश:

आपको बता दें इस बारे में ना ही नरेन्द्र मोदी ने कुछ बयान दिया और ना ही जयललिता ने, जो भी बाते मीडिया के सामने आयी सब पार्टी के लोगों के द्वारा आयी। इसके बाद से मोदी और जयललिता के सम्बन्ध व्यक्तिगत स्तर पर बहुत अच्छे हो गए। 2014 में सत्ता में नेरन्द्र मोदी के आने के बाद से ही जयललिता ने अपने सांसदों को यह निर्देश दे दिया था कि संसद में कोई भी ऐसा काम ना करें, जिससे प्रधानमंत्री को दिक्कत का सामना करना पड़े। दोनों के सम्बन्ध इतने अच्छे थे, इसी वजह से तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच कभी भी विवाद की स्थिति नहीं बनी।

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