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विवाद बढ़ता देश सीएम योगी ने हनुमान को दलित बताने वाले बयान पर तोड़ी चुप्पी

श्रीराम के बाद हनुमान पर मचे बवाल के बाद अब सीएम योगी ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सीएम योगी के हनुमान जी को दलित बताने के बाद मचे बवाल को शांत करने के लिए आखिरकार सीएम योगी ने बता दिया कि वह क्या कहना चाह रहे थे। सीएम प्रयागराज पहुंचे और और बिना किसी बात के ही उन्होंने खुद सफाई दे दी। बता दें कि हनुमान मंदिर में सीएम योगी एक कार्यक्रम के तहत पहुंचे थे। वहां जाकर उन्होंने पूजा अर्चना की और इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया।

सीएम योगी ने दी सफाई

सीएम योगी ने हनुमान को दलित बताने वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी एक बात को बेवजह तुल दिया जा रहा है। लोग उस बयान के बाल की खाल निकाल रहे हैं जिसका कोई मतलब नही है। इसके बाद उन्होंने कहा कि किसी के काम पर उंगली उठाना आसाना होता है, लेकिन दूसरों पर अंगुली उठाने के बजाय हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाने लगे तो यह धरती दिव्य लोक बन सकती हैं।

हनुमान को बताया था दलित

बता दें कि यह सारा बवाल वहां से शुरु हुआ था जब सीएम योगी ने राजस्थान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि एक ऐसे लोक देवता हैं जो अब स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित है। पूरे भारतीय समाज को उत्तर स लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं, ऐसे में बजरंग बली का संकल्प होना चाहिए।

उनके इस बयान के बाद दलित धीरे धीरे सामने आने लगे और उन्होंने दलित देवता हनुमान के नारे लगाना शुरु कर दिया। हाल ही में बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले ने सीएम योगी के बयान पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी दलित थे। इतना ही नहीं उन्होंने आगे यह भी कह दिया कि हनुमान जी मनुवादियों के गुलाम थे।

सावित्री बाई फुले ने सीएम का दिया साथ

अगर लोग कहते हैं कि भगवान राम हैं और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था। उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया है उन्हें बंदर क्यो ना बना दिया जाए। उन्हें इंसान बनाना चाहिए था, लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया। उनकी पूंछ में आग लगा दी गई, उनके चेहरे पर कालिख पोत दी गई, चूंकि वह दलित थे इसलिए उस समय भी का अपमान किया गया।

सावित्री बाई यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने आगे कहा कि हम तो यह देखते हैं कि अब देश तो ना भगवान के नाम पर चलेगी और ना ही मंदिर के नाम पर। अब देश चलेगा तो भारतीय संविधान के नाम पर। हमारे देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है। उसमें सभी धर्मों की सुरक्षा की गारंटी है। सबको बराबर का सम्मान और अधिकार है। किसी को ठेस पहुंचाने का अधिकार भी किसी को नही है। जो भी जिम्मेदार लोग बात करें भारत के संविधान के तहत करें गैर जिम्मेदाराना बात जनता को एक बार सोचने पर मजबूर करता है।इन्हीं सब बयानबाजी को बढ़ता देख और दलितों द्वारा हनुमान पर हक जताते देख आखिरकार सीएम योगी ने अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी।

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