द्रौपदी को अर्जुन से नहीं बल्कि इस योद्धा से था प्रेम, नहीं जानते होंगे आप

महाभारत की कहानी हर कोई जानता है। उसके हर एक पात्र की भी कई कहानियां थीं और वह सभी कहानियां बेहद दिलचस्प थीं। इसमें सबसे रोचक कहानियां वह थीं जिसमें द्रौपदी का जिक्र हुआ है। द्रौपदी के बारे में सभी जानते हैं कि उसका विवाह अर्जुन से हुआ था, लेकिन माता कुंती की कही बात के चलते उसे पांडवों से विवाह करना पड़ा था। द्रौपदी के मन में अर्जुन के लिए खास जगह जरुर थीं, लेकिन वह किसी और से प्रेम करती थीं।

कर्ण पर मोहित हुई थीं द्रौपदी

पांचाल देश के राजा द्रुपद की बेटी द्रौपदी की सुंदरता, बुद्धि और विवेक पर कई राजकुमार मोहित थीं। उस वक्त द्रौपदी को कर्ण पसंद आए थे। द्रौपदी ने जब कर्ण को देखा था को उन पर मोहित हो गई थी और उनसे प्रेम करने लगी थी। जब द्रुपद ने स्वंयवर की बात रखी तो द्रौपदी का मन खुश हो गया यह सोचकर कि वह कर्ण से शादी करेंगी।

हालांकि स्वयंवर का समय आते आते द्रौपदी को पता चल गया कि कर्ण अंगदेश का राजा दुर्योधन की वजह से बने हैं  और वह एक सूत पुत्र हैं। यह सच जानने के बाद द्रौपदी का मन खराब हो गया। वह नहीं चाहती थी की उसे सारी जिंदगी एक दासी के रुप में जाना जाए।

द्रौपदी एक राजकुमारी थीं और उनके पीछे हजारों दासियां उनकी सेवा में लगी रहती थीं। द्रौपदी के पता था कि वह एक दासी का जीवन नहीं व्यतीत कर सकती। उन्होंने फैसला किया कि वह कर्ण से विवाह नहीं करेंगी।

द्रौपदी ने किया कर्ण का अपमान

जब स्वयंवर का समय हुआ और कर्ण अपने स्थान पर खड़े हुए तो भरी सभा में द्रौपदी ने कहा कि मैं  एक सूत पुत्र से शादी नहीं कर सकती। कर्ण इस बात से बहुत अपमानित हो गए कि द्रौपदी जैसी निडर क्रांतिकारी राजकुमारी जाति में यकीन  रखती है।

इसके बाद अर्जुन के साथ द्रौपदी का विवाह हुआ, लेकिन सच यही है कि द्रौपदी के दिल में कर्ण का ही वास था। अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी ने कृष्ण की रची एक लीला में इस बात का खुलासा किया था कि वह कर्ण को बहुत चाहती हैं। इतना ही नहीं कर्ण भी द्रौपदी को चाहते थे।

भीष्म पितामह को बताया राज

जब युद्ध के दौरान भीष्म पितामह मृत्युशैय्या पर लेटे थे तो महारथी कर्ण उनसे मिलने पहुंचा। उन्होंने भीष्म पितामह से अपने जीवन प्रेम का रहस्य बताया औऱ जब वह यह बातें कर रहे थे तो द्रौपदी को इस बात का पता चल गया कि कर्ण भी उनसे उतना ही प्यार करते हैं।

हालांकि कर्ण और अर्जुन एक दूसरे के परस्पर विरोधी थे। यहां तक की यह जानने के बाद कि पांडव कर्ण के भाई हैं। कर्ण ने माता कुंती से कहा था कि युद्ध भूमि में तुम्हारे 5 पुत्र ही जीवित बचेंगे। मैं अर्जुन के प्राण छोड़कर किसी की भी हत्या नहीं करुंगा।

युद्ध के वक्त अर्जुन के हाथों ही कर्ण का अंत हुआ। इसी अंत के साथ इस प्रेम कहानी का अंत हुआ। हालांकि ना कभी द्रौपदी ने और ना ही कभी कर्ण ने एक दूसरे से प्रेम का इजहार किया और दोनों हमेशा मन ही मन एक दूसरे को चाहते रहे।

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