जाने, शरद पूर्णिमा में चाँद की रौशनी में खीर रखे जाने का क्या है रहस्य

न्यूजट्रेंड एस्ट्रो डेस्क : हमारे हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बताया जाता है की शरद पुर्णिमा के दिन ही मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। आपकी जानकारी के लिए बता दें की आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। आश्विन मास की शरद पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है, आपने कई जगहों से सुना होगा की शरद पुर्णिमा के शुभ अवसर पर खीर बनाने का रिवाज है और उस खीर को अगली सुबह खाने की परंपरा है। कहा जाता है की शरद पूर्णिमा की रात को खीर पकाकर चांद की रोशनी में रखा जाता है मगर क्या आप जानते हैं की ऐसा क्यों किया जाता है, ऐसा करने के पीछे क्या वजह या मान्यता हो सकती है।

 शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा को खीर क्यों खाते है?

हमारे हिन्दू धर्म मे एक से बढ़कर एक प्रथाएँ और मान्यताएँ हैं जिनका बहुत ही सममानपूर्वक पालन किया जाता है और उसी मान्यताओं में एक है शरद पुर्णिमा की रात खीर बना कर चंद्रमा के प्रकाश में रखना। असल में आपको बता दें की खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखने के पीछे धार्मिक वजह तो है ही साथ ही साथ इसका वैज्ञानिक कारण भी हैं।

यदि धार्मिक कारण की बात की जाए तो आपको बता दें की शास्त्रों के अनुसार मान्यता है की धन की देवी माँ लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही’ हुआ था और ऐसे में इस दिन माँ लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं। यही वजह है की उस रात आसमान में चंद्रमा भी सामान्य से ज्यादा चमकता है। लोगों में ऐसा विश्वास है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं और यही वजह है की लोग इस खास मौके पर खीर बना कर घर के आँगन या छत पर रखते है ताकि उनके पात्र में भी अमृत का अंश मिल जाए। बता दें की इस दिन सुबह के समय घर में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।

 शरद पूर्णिमा

वहीं दूसरी तरफ अगर इसके वैज्ञानिक कारण की बात करें तो आपको बताते चलें की दूध में लैक्टिक एसिड और अमृत तत्व मौजूद होता है जो कि चंद्रमा की किरणों से और भी अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चूंकि इस बात से हम सब बेहतर अवगत हैं की चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है और इसी वजह से ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। आपकी जानकारी के लिए यह भी बताते चलें की खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए क्योंकि चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है और इसके सेवन से विषाणु दूर रहते हैं।

 शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा के दिन क्या करें?

  • बता दें की इस दिन पूर्ण रूप से जल और फल ग्रहण करके उपवास रखने का प्रयास करना चाहिए।
  • कहा जाता है की यदि आप उपवास रखें या फिर ना रखें, मगर इस बात अविशेष ध्यान रखें की इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
  • बताया जाता है की शरद पुर्णिमा के दिन शरीर के शुद्ध और खाली रहने से आप ज्यादा बेहतर तरीके से अमृत की प्राप्ति कर पाएंगे।
  • शरद उरनीमा के दिन काले रंग का प्रयोग भूल से भी ना करें।
  • शरद पूर्णिमा के दिन  कोशिश करें की चमकदार सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण करें यह ज्यादा अच्छा माना जाता है।