बलशाली रावण को राम से ही नहीं बल्कि इन चार लोगों से भी मिली थी हार

न्यूजट्रेंड वेब डेस्कः आज पूरे देश में दशहरा का त्यौहार मनाया जा रहा है। आज जगह जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पूतले जलाए जाएंगे। दशहरा मनाने का कारण तो हम सब बचपन से जानते हैं कि इस दिन भगवान राम ने घमंडी रावण का वध करके समाज में ये संदेश दिया था कि बुराई कितनी भी बलशाली क्यों ना हो अच्छाई के सामने वो कम पड़ ही जाती है। हालांकि रावण को हराने वाले श्री राम अकेले नहीं थे। उनके वध करने से पहले और भी 4 महाबलियों से रावण हार चुका था। आज आपको बताते हैं कौन थे वो लोग जिन्होंने रावण को किया था परास्त।

बालि की काख में रावण

रामायण पढ़ते देखते वक्त आपके सामने बालि का जिक्र जरुर हुआ होगा। बाली और सुग्रीव भाई थे और बालि ने सुग्रीव की पत्नी का हरण कर लिया था। उस वक्त बालि को खत्म करने के लिए सुग्रीव ने श्री राम से मदद मांगी थी और राम ने बालि का खात्मा किया था।

बालि को खत्म करना आसान नहीं थी। वो बहुत ही शक्तिशाली था। एक बार रावण जब बालि से युद्ध करने पहुंचा था तो बालि उस समय पूजा कर रहा था। रावण के युद्ध की बात सुनकर उसका ध्यान भटक गया। बालि की रोज की आदत थी की वो समुद्र की चार परिक्रमा करके सूर्य को जल अर्पित करता था।

रावण से क्रोधित होकर बालि ने रावण को अपनी काख यानी बाजू में दबा लिया और समुद्र की परिक्रमा की। रावण ने बहुत कोशिश की , लेकिन वो बालि की पकड़ से खुद को छुड़ा नहीं पाया। हालांकि बाद में रावण और बाली की मित्रता हो गई थी।

स्हस्त्रबाहु अर्जुन से हारा रावण

रावण को अपने ऊपर बहुत घमंड था कि उसे कोई परास्त नहीं कर सकता। रावण अपनी सेना लेकर सहस्त्रबाहु अर्जुन से युद्ध करने पहुंचा जिसके 1 हजार हात थे। अर्जुन ने अपने हजारों हाथों से नर्मदा नदी के बहाव को रोक दिया और थोडी देर बाद पानी को छोड़ दिया।

 

रावण की पूरी सेना नर्मदा के बहव में बह गई। इसके बाद रावण ने दोबारा युद्ध करने की कोशिश की थी तब सहस्त्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था। जब रावण के दादा को इस बात का पता चला तो उन्होंने रावण को आजाद करवाया।

राजा बलि के महल में रावण की हार

पाताल लोक के राजा दैत्यराज बलि थे। रावण उनसे युद्ध करना चाहता था। रावण ने युद्ध करने के लिए पाताल लोक में उनके महल में गया। जब रावण ने युद्ध के लिए कदम आगे बढ़ाए तो बलि के महल में खेल रहे बच्चों ने रावण को पकड़कर अस्तबल में बांध दिया। रावण बड़ी मुश्किल से खुद को बचाने में कामयाब हुआ था।

शिव जी से मिली हार

रावण जी शिव जी का परम भक्त था।इससे पहले रावण भी शिव जी से युद्ध करने के लिए गया था। ध्यान में लीन शिव जो को युद्ध करने की चुनौती दी। रावण कैलाथ पर्वत उठाकर जाने लगा तो शिव जी ने पैर के अंगूठे से ही कैलाश का भार बढ़ा दिया और रावण की हालत खराब होने लगी। इसके बाद से ही रावण शिव जी का परम भक्त बन गया और से कई तरह के ज्ञान प्राप्त हुए।