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क्या केजरीवाल DTC बसों के ज़रिए कर रहें है अपनी ब्लैकमनी को सफ़ेद? जानें क्या है सच्चाई!

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री मोदी के 8 नवम्बर को लिए गए नोटबंदी के निर्णय को देश कि जनता ने काफी सराहा है और इसे एक बोल्ड निर्णय करार दिया। लेकिन कुछ नेता झुठे आरोपों द्वारा इस निर्णय को गलत साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। और इनमें सबसे ज्यादा विरोध दिल्ली से सीएम अरविन्द केजरीवाल और कोलकत्ता से उनकी समकक्ष ममता बनर्जी कर रहीं हैं।  Kejriwal DTC buses black money.

लेकिन, केजरीवाल कि आम आदमी पार्टी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या पार्टी DTC (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) के ज़रिए अपने पुराने 500 और 1000 रुपए के नोटों को नए नोटों से बदलवा रही है? यह सवाल हम नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ जागरुक नागरिकों ने उठाया है।

 

DTC के ज़रिए ऐसे बदला जा रहा है कालाधन –

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से यह बात जोरों पर है कि DTC यात्रियों से छोटे नोट ले रही है लेकिन सरकारी खजाने में कलेक्शन के नाम पर बड़े नोट जमा किए जा रहे हैं। शक ही बड़ी वजह यह है कि 8 नवंबर के बाद से ही दिल्ली सरकार द्वारा आदेश जारी हुआ था कि DTC में 500 और 1000 का नोट मान्य नहीं होगा। सरकार चाहती तो यात्रियों को छूट दे सकती थी और मान्य तरीके से बैक के जऱिए पुराने नोटों को बदलवा सकती थी।

गौरतलब है कि बसों द्वारा सारा कैश DTC डिपो में जमा होता है उसके बाद उसे बैंको में जमा कराया जाता है। लेकिन, ऐसा बताया जा रहा है कलेक्शन के बाद जो पैसे डिपो में जमा करवाएं जा रहे हैं वो छोटे नोट नहीं बल्कि 500 और 1000 के पुराने नोट हैं। पर DTC कि बसों में सफर करने वाला हर व्यक्ति जानता है कि बसों में ज्यादातर 100 या इससे नीचे के नोट ही आते हैं। सीधे तौर पर शक दिल्ली कि सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज आम आदमी पार्टी और उनके मुखिया अरविंद केजरीवाल पर है। देखिये किस तरह आम जनता इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया जा रहा है –



नोटबंदी से आप पार्टी को हुआ है भारी नुकसान –   

ऐसा कहा जा रहा है कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से आम आदमी पार्टी को भारी नुकसान हुआ है। यह भी आरोप है कि पार्टी ने पंजाब चुनाव लड़ने के लिये खालिस्तान समर्थकों से हवाला के ज़रिए भारी रकम इकट्ठा किया था। पीएम मोदी के फैसले के बाद यह रकम पूरी तरह बेकार हो गई है। ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आम आदमी पार्टी या उसके जैसे दूसरे राजनीतिक दल अपनी ब्लैकमनी को सफ़ेद करने के लिये अलग रास्ते तलाश रहें हैं। इस बात की जाँच की जानी चाहिए कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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