सेल्फी की दीवानगी ने ले ली कईयों की जान: भारत में लगातार हो रही मौतें

पिछले कुछ सालों में स्मर्त्फोने रखने वालों की संख्या में लगातार इजाफ़ा हो रहा है। आज से 10 साल पहले कुछ चुनिन्दा लोग ही होते थे जिनके पास मोबाइल होता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में मोबाइल की दीवानगी लोगों में इस कदर बढ़ी है कि रिक्शे वाले भी बड़ी- बड़ी स्क्रीन की मोबाइल रखने लगे हैं। खाने के लिए पैसे हो ना हो पर मोबाइल जरूर होना चाहिए। उसमे जबसे सेल्फी लेने का जो सिलसिला चल पड़ा है, तब से लोगों की लगातार मौत हो रही है।

पिछले हफ्ते की ही बात है राजस्थान क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुआ। वीडियो में एक बहादुर लड़का स्कूल में पकड़े गए अजगर के साथ अपने मनपसंद पोज़ में सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा था। अजगर को गुसा आ गया, कि एक तो मुझे पकड़ा हुआ है और घुमा- घुमा के फोटो भी ले रहा है। फिर क्या था अजगर ने लड़के पर हमला कर दिया। लड़के की किस्मत अच्छी थी कि वह बच गया। लेकिन बहुत से लोग इतने किस्मत वाले नहीं रहे।

आँकड़ों के मुताबिक सेल्फी की यह जानलेवा दीवानगी भारत में ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में बहुत तेजी से फैल रहा है। अपने मन मुताबिक सेल्फी लेने के चक्कर में लोग कुछ भी करने को तैयार हैं, और ऐसे ऐसे खतरे उठा रहे हैं कि जान से हाथ धोना पड़ जा रहा हैं। चलती हुई ट्रेन के सामने, गहरे समुद्र में, पहाड़ की जानलेवा ऊँचाई पर, नदी के पुल पर सेल्फी लेने वाले बहादुर पहुँच जा रहे रहे हैं। उन्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं है, जितना ज्यादा खतरा उतना ज्यादा सेल्फी अच्छा।

पिछले दिनों मई में पंजाब में के एक युवक की सेल्फी लेते वक्त जान चली गई। वह अपनी कनपटी पर रिवॉल्वर तानकर सेल्फी ले रहा था। गलती से बन्दूक चल गई। जुलाई में गंगा नदी की तेज धार में सात युवकों ने सेल्फी लेने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। उनमे से एक युवक सेल्फी लेने की कोशिश में नदी में गिर गया और उसे बचाने के चक्कर में बाकी लोग भी नदी में कूद गए। सब के सब मरे गए, कोई नहीं बचा। इसी महीने तेलंगाना में छह लड़कियों की जान सेल्फी लेने में चली गई, जब सारी लड़कियां झील में चट्टान पर खड़ी होकर सेल्फी लेने का प्रयास कर रही थीं और गिर गईं।

विशेषज्ञों की राय:

नई दिल्ली में समाजविज्ञान के प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव कहते हैं, “भारत में सेल्फी को लेकर पागलपन छाया हुआ है। दूसरों को दिखने के चक्कर में युवा अपनी जान की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। वे एक्स्ट्राऑर्डिनरी नजर आना चाहते हैं।”

हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, सेल्फी की वजह से जितनी मौतें हुई हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या 18 से 24 साल के युवाओं की है। व्यवहार विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सिंह कहते हैं कि “खासकर बड़े शहरों में युवा खूब प्रसिद्ध होना चाहते हैं। आज के समय में सभी लोग मशहूर होना चाहते हैं। सेल्फी के प्रति पागलपन व्यवहार के इसी पहलू को दिखाती है।”
अमेरिका की मीडिया संस्थान न्यूजग्राम के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने के कारण ही लोग खतरनाक जगहों या परिस्थितियों में सेल्फी खींच रहे हैं। यहाँ तक कि वे खूंखार जानवरों के साथ भी सेल्फी लेने से बिलकुल भी नहीं हिचकते।

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