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सबरीमाला मंदिर में संग्राम जारी, SC के आदेश के बाद भी महिलाओं को प्रवेश से रोका

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद आज पहली बार सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने जा रहे हैं। लेकिन स्वामी अय्प्पा और मंदिर प्रशासन अब भी महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। आपको बता दें कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता था। लेकिन बीते 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था और इसे असंवैधानिक करार दिया। और कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न मिलना उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

लेकिन इस मामले मेंं अब भी हंगामा जारी है। आज मंदिर के दरवाजा खुलने के बाद जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने वाले लोग है तो दूसरी तरफ भारी संख्या में इसका विरोध करने वाले भी हैं। रूढ़ीवादी परंपराओं को मानने वाले सुप्रीम कोर्ट ेके आदेश के बाद भी महिलाओं को मंदिर में जाने नहीं  दे रहे हैं। आज मंदिर जाने के प्रमुख रास्ते के बाहर तनाव पूर्ण माहौल है। जिसको देखते हुए पुलिस और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर दिये गए हैं।

मंदिर परिसर के बाहर माहौल तनावपूर्ण- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार दरवाजे आज खुले हैं। और बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु अयप्पा के दर्शन के लिए जुट गए हैं। लेकिन महिलाओं को प्रवेश नहीं देने की कोशिश की जा रही है। वहीं मंदिर परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन और तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

वहीं दूसरी ओर तनाव तब और बढ़ गया जब भगवान अयप्पा के महिला भक्तों ने मुख्य द्वार जो निलक्केल में है वहां कई वाहनों को रोककर चेक किया और मासिक धर्म की उम्र वाली सभी महिलाओं को आगे जाने से रोक दिया गया। इसके बाद से मंदिर परिसर के बाहर तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है।

 

सभी श्रद्धालुओं की रक्षा की जाएगी- मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इस मामले में कहा है कि सभी महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्ति की जाएगी। उन्होंने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से रोकने वालों को कड़ी फटकार लगाई है। कहा कि उनकी सरकार में सबरीमाला मंदिर के नाम पर कोई हिंसा नहीं होने देगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि हम सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।

सीएम पिनरई विजयन ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। और जो भी मंदिर प्रवेश में महिलाओं को रोकने की कोशिश करेगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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