किशोर कुमार एनिवर्सिरीः इस एक गाने ने चमका दी थी किशोर की किस्मत

न्यूज़ट्रेन्ड बॉलीवुड डेस्क- एक हरफनमौला कलाकार जिसकी आवाज जितनी सुरीली थी तबियत उतनी ही रंगीन मिजाज, वो थे सुरों के सरताज किशोर कुमार। आज किशोर कुमार की 31वीं बरसी हैं। 13 अक्टूबर 1987 को हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। किशोर कुमार सिर्फ गायक ही नहीं बल्कि संगीतकार, लेखक, निर्माता निर्देशक भी थें। उनकी आवाज में जो जादू था उसने लोगों को गुनगुनाना सिखाया। आज भी कितने ही सारे किशोर कुमार के गाए हुए गीत को लोग रिमिक्स कर बनाते हैं। आइये जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ीं कुछ खास बातें।

ऐसे हुई सुरीली आवाज-

किशोर कुमार अभिनेता अशोक कुमार के छोटे भाई थे। अशोक बताते थे कि किशोर की आवाज बचपन में बेहद ही बेसुरी हुआ करती थी.य जब वो गाते थे तो लगता था जैसे कोई फंटे बांस से आवाज आ रही हो। एक बार वो किचम में गए और उनकी नजर दराती पर पड़ गई और फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान किशोर इतना रोए कि उनकी आवाज सुरीली हो गई।

किशोर कुमार जब संगीत की ऊंचाईयों पर पहुंचे तो उस दशक के वो सबसे महंगे सिंगर बनें। उन्होंने 70-80 के समय में लगभग सभी कलाकारोंको अपनी आवाज दी, लेकिन उनकी आवाज का जादू सबसे ज्यादा चला राजेश खन्ना पर। जैसे काका की फिल्में वैसे ही किशोर की आवाज। इस आवाज में वो जादू था जिसने राजेश खन्ना को सुपरस्टार बना दिया था।

किशोर का जन्म एमपी के खंडवा में हुआ था और उनका दिल हमेशा वहीं लगा रहता था। उन्हें मुंबई कभी रास नहीं आई। वो कहते थे कौन मुर्ख इस शहर में रहना चाहता है। मैं अपने शहर चला जाऊंगा खंडवा में। इस बदसूरत शहर में कौन रहे।

चार शादियां-

किशोर कुमार जितने हंसते खेलते व्यक्तित्व के व्यक्ति थे उनकी निजी जिंदगी में उन्हें वो खुशी नहीं मिल पाई। उन्होंने चार शादियां की थी।पहली शादी रुमा घोष से की जो कि एक प्रसिद्ध गायिका थीं। उनकी पहली शादी सिर्फ 8 साल चली। उन्होंने दूसरी शादी मधुबाला से की थी और उनके लिए किशोर ने इस्लाम धर्म भी कबूल कर लिया था। मधुबाला का कम उम्र में निधन हो गया। किशोर ने तीसरी शादी योगिता बाली से की जो सिर्फ दो साल चली और उनकी चौथी पत्नी बनी लीना चंदावरकर जो उनके अंतिम पल तक उनके साथ रहीं।

किशोर कुमार गायक से कहीं ज्यादा एक अभिनेता बनना चाहते थे। शायद उनकी ख्वाहिश की एक वजह ये भी थी की जब वो कॉलेज में पढ़ाई करते थे उस वक्त उनके बड़े भाई अशोक कुमार एक जाना माना नाम थे। उन्होंने पर्दे पर एक्टिंग का मन बना लिया। किशोर ने अपने अंदर के हास्य कलाकर को भी खोज लिया और उन्होंने फिल्म चलती का नाम गाड़ी बनाई जो उन दिनों ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

एक गाने ने बना दिया सुपरस्टार-

हालांकि पड़ोसन और चलती का नाम गाड़ी छोड़कर उनकी कोई और फिल्म सफल नहीं हुऊ और उन्होंने अपना ध्यान गाने में लगा लिया। इसके बाद उन्हें मौका मिला फिल्म अराधना में “मेरे सपनों की रानी” गाना गाने का। ये गाना जबरदस्त हिट हुआ। उस वक्त हर एक निर्माता, निर्देशक किशोर को ही अपनी फिल्म में गाना गाने के लिए बेताब रहता था।

किशोर कुमार ने एक से बढ़कर एक संगीत गाए जिसमें रुप तेरा मस्ताना, दिल किसी ने मेरा, खइके पान बनारस वाला, हजार राहें मुड़के देखें, पग घुंघरु बांध, अगर तुम ना होते, मंजिलें अपनी जगह, सागर किनारे जैसे गानों का आज भी कोई मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने इसके साथ बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन पुरुस्कार जीते।साथ ही चार बार सर्वेश्रेष्ठ पुरुष पार्शगायक का अवॉर्ड भी अपने नाम किया।

किशोर कुमार को अपनी मौत का आभास पहले ही हो चुका था। किशोर कुमार के बेटे ने कहा था कि एक दिन किशोर इ बात को लेकर चिंतित थे कि कनाडा से उनकी फ्लाइट सही वक्त पर लैंड करेगी या नहीं। एक दिन उन्होंने मजाक में कहा कि अगर हमने डॉक्टर को बुलाया तो उन्हों हॉर्ट अटैक आ जाएगा और अगले ही पल उन्हें हॉर्ट अटैक आ गया। उनका अतिंम संस्कार खंडवा में ही हुआ था। किशोर भले ही चले गए, लेकिन अपने पीछे अपनी आवाज का वो जादू छोड़ गए जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।