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अमावस्या के दिन जन्म माना जाता है अशुभ, जानिए इसके उपाय

अमावस्या के दिन जन्म: हिंदू धर्म में हर दिन को ख़ास माना जाता है. लेकिन अमावस्या का दिन एकमात्र ऐसा दिन है, जिसे हिंदू धर्म में एक श्राप की तरह माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को जीवन में कभी खुशियाँ नहीं मिलती और घर में संकट एवं दुखों का माहोल बना रहता है. अमावस्या हर माह के कृष्ण पक्ष में आती है. ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या के दिन प्रेत आत्माएं अधिक सक्रिय होती हैं. ऐसे में घर में इन आत्माओं और नकारात्मक उर्जा से बचने के लिए हमे पूजा पाठ पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. अमावस्या के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को अशुभता एवं बुरे का संकेत माना जाता है.

हिंदू धर्म के कैलेंडर के अनुसार हर महीने में अमावस्या आवश्य आती है. इस दिन हमे चाँद बिलकुल दिखाई नहीं देता जिसके कारण इस रात को कालरात्रि भी कहा जाता है. इस दिन नकारात्मक उर्जा सबसे अधिक प्रभावी होती होती है ऐसे में अमावस्या के दिन जानम लेने वाले बच्चे की कुंडली में दोष बताया जाता है. इन बच्चों की कुंडली में सूर्य और चंद्रमा एक ही घर में होते हैं.

अमावस्या के दिन जन्म- माँ बाप से मतभेद

चंद्रमा को मन का स्वामी माना जाता है जबकि सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है. ऐसे में अमावस्या के दिन जन्म लेने वाले बच्चे की कुंडली में दोनों ग्रहों का एक साथ प्रवेश करना बेहद अशुभ माना जाता है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य और चाँद मौजूद हैं तो उसे अपने माता पिता ससे कभी सुख नहीं मिलता और घर में अनबन का माहोल बना रहता है.

अमावस्या के दिन जन्म- अपमानित जिंदगी

अमावस्या के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति की कुंडली के 10वें भाग में सूर्य और चंद्र का मौजूद होना इस बात का संकेत देता है कि ऐसे व्यक्ति शरीर से काफी बलवान एवं मजबूत होते हैं. ऐसे व्यक्ति शत्रु को पराजित करके जीत हासिल कर सकते हैं लेकिन इनकी जिंदगी में इन्हें अपनों से हमेशा अपमानजनक स्तिथि मिलती है. ऐसे व्यक्ति जीवन भर अपनी संतान और घर की स्त्रीयों से अपमानित होते रहते हैं.

अमावस्या के दिन जन्म- सोमवती अमावस्या

यदि अमावस्या दोम्वर वाले दिन पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. यह हर वर्ष में कम से कम दो बार आती है. सोमवती अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. ऐसी मान्य है कि यदि कोई वैवाहिक स्त्री इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है तो वह व्रत आवश्य सफल होता है. इसके इलावा इस दिन मौन व्रत धारण करने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है. सोमवती अमावस्या को लेकर एक कथा काफी प्रचलित है. कहा जाता है कि एक समय में एक ब्राह्मण परिवार था. उनके घर एक पुत्री ने जन्म लिया.

समय के साथ साथ पुत्री बढ़ी हो रही थी वहीँ उसके स्त्रियोचित गुणों  का विकास हो रहा था. लोगों के अनुसार वह लड़की दिखने में बेहद सुंदर थी और साथ ही वह महागुणी थी लेकिन इस सब के बावजूद भी उसका विवाह नहीं हो पा रहा था. एक दिन उनके घर एक साधू आए. उन्होंने साधू को भोजन करवाया और खूब सेवा की. साधू उस परिवार की सेवा भक्ति देख कर काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद दिया. लेकिन जब उन्होंने उस लड़की की हथेली देखी तो वहां उन्हें उसके विवाह की रेखा नहीं मिली. जिसका उपाय पूछने पर साधू ने बताया कि कुछ दूरी पर एक गाँव में सोना नाम की एक धोबी जाती की स्त्री अपने बहुत और बेटे के साथ रहती है. साधू के अनुसार वह स्त्री बेहद संस्कारी है और उसका पति परायण है. यदि वह स्त्री उनकी लड़की की सेवा भाव से प्रसन्न हो कर लड़की की शादी में अपनी मांग का सिन्दूर लगा दे तो लड़की का वैधव्य योग मिट सकता है.

साधू के अनुसार वह धोबिन हमेशा घर में रहती थी और बाहर नहीं आती जाती थी. साधू के निर्देशानुसार कन्या को धोबिन की सेवा के लिए उस गाँव में भेज दिया गया. कन्या सुबह तडके धोबिन के घर जाकर चुप चाप सारे घर का काम कर आती. जब धोबिन ने अपनी बहु से सुबह होने वाली सफाई का पुछा तो बहु ने बताया कि वह खुद नहीं जानती कि आखिर इतनी सुबह काम कौन करता है. ऐसे में धोबिन ने घर की निगरानी शुरू कर दी. ज्सिके बाद उसे पता चला कि एक कन्या सुबह सवेरे उनके घर का काम करने आती है और फिर चुपके से वापिस लौट जाती है.धोबिन ने उस कन्या को रोक कर सारी सच्चाई जानी और उसकी शादी में अपनी मांग का सिन्दूर लगाने की हामी भर दी.

जैसे ही कन्या की मांग में धोबिन ने सिंदूर लगाया तो उसका अपनी पति मर गया. जब धोबिन को पति की मृत्यु की ख़बर मिली तो वह घर से निरजल निकल पड़ी और रास्ते में पीपल के पेड़ को भंवरी देने के बाद उसने जल ग्रहण किया. कहा जाता है कि उस दिन सोमवार की अमावस्या थी. जैसे ही धोबिन ने 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा ख़तम करके जल ग्रहण किया, उसका मृत पति जाग उठा. तब से लेकर आज तक, सोमवार की अमावस्या प्रचलित है.

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