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जिसे पत्थर समझकर रखा था घर में वो थी ऐसी चीज, जिसकी कीमत जानकर हर कोई रह गया दंग

अक्सर हम अपने दरवाजे को खुला रखने के लिए किसी चीज को उससे अड़ाकर रखते हैं ताकि बार-बार दरवाजा खोलने और बंद करने की नौबत ना आए और ऐसे में हम कई बार किसी तरह के लोहे या पत्थर का इस्तेमाल करते हैं। मगर तब आप क्या करेंगे जब आपको पता चले की आप जिस पत्थर को दरवाजे को अड़ाकर रखने में इस्तेमाल कर रहे थे, उस पत्थर की कीमत लाखो की हैं तो शायद आप हैरान रह जाए। जी हाँ, ऐसा ही कुछ अमेरिका के मिशिगन में रहने वाले व्यक्ति के साथ हुआ। असल में यह व्यक्ति करीब 30 वर्षों से 10 किलो वजनी एक पत्थर के टुकड़े को अड़ाकर दरवाजा बंद करने में इस्तेमाल करता था, मगर किसी  इस से जब इस पत्थर कि कीमत का पता चला तो उसके होश ही उड़ गए।

बता दें की उस पत्थर की कीमत 1 लाख डॉलर यानी लगभग 74 लाख रुपये बताई गयी हैं। असल में यह और कुछ नहीं बल्कि एक उल्कापिंड का टुकड़ा है जो उस व्यक्ति को उपहार के तौर पर मिला था जब 1988 में उसने अपनी संपत्ति को बेची थी। यह उल्कापिंड उसे 1930 के दशक में अपने खेत के खुदाई करते वक़्त प्राप्त हुआ था और तब उस समय वो काफी गरम था। इस पत्थर के बारे में उस मकान के नए मालिक ने बताया कि यह पत्थर मुझे देखने में ठीक-ठाक लगा और मैं इसका इस्तेमाल दरवाजे को अड़ाने में करने लगा। ऐसे में एक दिन मुझे ख्याल आया कि क्यों ना इस पत्थर की कीमत बाजार में पता की जाए और मैं कीमत जानने के लिए इसे बाजार में ले गया, जहां जाने के बाद मुझे पता चला कि इसकी कीमत लगभग 1 लाख डॉलर हैं और यह सुनकर मैं हैरान रह गया।

मुझे हैरानी तब और हुई जब मुझे पता चला कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि उल्का पिंड हैं, इसके बाद मैं इस पत्थर को मिशिगन यूनिवर्सिटी ले गया। यहां पर जियोलॉजी की प्रोफेसर मोनालिसा सर्बेस्कु ने इस पत्थर का आकार देखकर चौंक गईं और उन्होंने पत्थर का एक्सरे फ्लोरोसेंस से परीक्षण कराने का फैसला लिया। जांच से पता चला कि इस पत्थर में 88% लोहा, 12% निकल और कुछ मात्रा में भारी धातुएं जैसे- इरीडियम, गैलियम और सोने की मात्रा भी मौजूद है। इसके बाद इस पत्थर को मोनालिसा ने पत्थर के कुछ अंश को वॉशिंगटन के स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट भेजा, जहां पर इसके उल्कापिंड होने की पुष्टि हुई।

सभी तरह के जांच आदि के बाद इस पत्थर को एडमोर उल्कापिंड नाम दिया गया है, क्योंकि यह एडमोर में ही गिरा था। अब इस पत्थर यानी उल्कापिंड का नमूना कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्लेनेटरी-साइंस डिपार्टमेंट भेजा गया है ताकि उसका रासायनिक संघटन जांचा जा सके जिससे की भविष्य में इस तरह के पत्थरो और उल्काओं के बारे में जाना जा सके। आपको बता दें कि धरती का सबसे बड़ा उल्कापिंड नामीबिया के होबा में मिला था, जिसका इसका वजन 6600 किलो था और इसका भी ज्यादातर हिस्सा लोहे और निकल का था। असल में मंगल और बृहस्पति के बीच कई क्षुद्रग्रह कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं और इनके टुकड़े को ही उल्का कहा जाता है। कई बार ऐसा होता हैं कि उल्काएं धरती की कक्षा में प्रवेश कर जाती हैं और वायुमंडल के चलते छोटी उल्काएं जलकर नष्ट हो जाती हैं, ऐसे में बड़े उल्कापिंड धरती से टकरा जाती हैं और वो कभी-कभी पत्थरो के आकार में जमीन पर गिर जाती हैं।

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