सरकारी नौकरी: जानिए सरकारी नौकरी प्राइवेट नौकरी में अंतर

सरकारी नौकरी: आज के समय में नौकरी पाना सबसे कठिन हो गया है. भारत के 40 % नौजवान पढाई पूरी करने के बाद भी बेरोजगार है. इस बेरोजगारी के पीछे कईं छोटे और बड़े कारण हो सकते हैं. ऐसे सरकारी नौकरी पाना ही सबका एकमात्र सपना है. आपने अपने बचपन से लेकर जवानी तक घर के बूढ़े बजुर्गों से सरकारी नौकरी और सरकारी पोस्ट के गुण-गान सुने होंगे. लेकिन अब सरकारी नौकरी पाना आसमान छूने जितना कठिन हो गया है. भारत के 99 फ़ीसदी लोग अपनी परिवते नौकरियों से परेशान हैं और सरकारी नौकरी पाने के लिए दिन रात मेहनत में जुटे हुए हैं. दरअसल, सरकारी नौकरी में ना केवल हमे सैलरी अधिक मिलती है, बल्कि हमे काम का लोड भी कम रहता है. ऐसे में कम मेहनत में ज्यादा पैसे पाना भला कौन नहीं चाहेगा?

आज हम आपको सरकारी और प्राइवेट नौकरी से जुड़े कुछ अंतर और सरकारी नौकरी के फायदे बताने जा रहे हैं. इन फायदों को पढ़ कर आप भी इन नौकरियों की परीक्षा में बैठने को तैयार हो जाएंगे. गौरतलब है कि आज के समय में सरकारी नौकरियों का इतना बोल-बाला है कि हर कोई इन पोस्ट को पाने के सपने देखता है. सरकारी नौकरी कईं तरह के विभागों में होती है. इनमे से रेलवे विभाग, बैंकिंग सेक्टर, टीचिंग आदि मुख्य पोस्ट है. इन पदों को पाने के लिए हर साल लाखों लोग परीक्षा देते हैं.

सरकारी नौकरी- 8 घंटे की नौकरी

प्राइवेट नौकरियों की सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि हर काम करने वाले को बॉस के अधीन होकर रेहना पड़ता है और कईं बार देर रात तक ओवर टाइम करके भी उन्हें अधिक मेहनताना नहीं मिल पाता. वहीँ बात सरकारी नौकरी की करें तो 8 घंटे के कर्मचारी बन कर हम कुर्सी पर बैठे बैठे अपना हुकुम चला सकते हैं और अच्छी सैलरी प्राप्त कर सकते हैं.

सरकारी नौकरी- बेहतरीन सैलरी पैकेज

प्राइवेट नौकरियों में अक्सर कर्मचारियों को अपने बॉस के आगे पीछे घूमना पड़ता है ताकि उनका बॉस उनसे खुश हो कर उन्हें अच्छी प्रमोशन दे. वहीँ सरकारी नौकरी में ऐसा बिलकुल नहीं है यहाँ आपको सालों साल सैलरी बढने का इंतज़ार नही करना पड़ता और ना ही आपको अधिक ओवर टाइम करना पड़ेगा, क्यूंकि सरकार अपने कर्मचारियों को कम काम के बदले अच्छा सैलरी पैकेज मुहैया करवाती है.

सरकारी नौकरी- बादशाही कुर्सी

जिस तरह राजा अपनी कुर्सी पर बैठ कर हुकुम चलाता है, ठीक उसी तरह सरकारी नौकरी वाले कर्मचारियों की जिंदगी भी किसी बादशाह से कम नही होती. दिन भर कुर्सी पर बैठे बैठे हुकुम चलाने में सरकारी अफसर अच्छा ख़ासा धन कमा लेते हैं. ऐसे में बादशाही को छोड़ कर भला कौन प्राइवेट नौकरी के सपने देखेगा?

सरकारी नौकरी- शनिवार को आराम

आपने अक्सर देखा होगा कि प्राइवेट दफ्तरों में हर रोज़ काम होता है और केवल रविवार को ही आराम मिलता है. इतना ही नहीं कुछ प्राइवेट दफतरों में रविवार की छुट्टी पर भी बैन लगाया जाता है. वहीँ सरकारी कर्मचारियों को हफ्ते में 5 दिन काम और दो दिन का आराम दिया जाता है. ऐसे में प्राइवेट नौकरी वालों का फॅमिली टाइम भी ऑफिस की स्ट्रेस में निकल जाता है.

सरकारी नौकरी- फ्री इलाज

इंसान अगर अपनी क्षमता से अधिक काम करता है तो वह जल्दी थक जाता है और बीमार पड़ जाता है. ऐसे में प्राइवेट दफ्तरों के अधिकतर कर्मचारियों की छुट्टी लेने की वजह बिमारी ही होती है. वहीँ बात अगर सरकारी नौकरी की करें तो , सरकार अपने कर्मचारियों के फ्री चेक-अप और इलाज का पूरा ध्यान रखती है.

सरकारी नौकरी- रिटायरमेंट पर भी सैलरी

प्राइवेट दफ्तरों में रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति की सेविंगस ही उसकी पूँजी होती हैं. जबकि सरकारी नौकरी में सरकार अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बुढापे में उन्हें पेंशन देती है ताकि आगे जाकर उनके कर्मचारियों को पैसे के पीछे ना भागना पड़े.