भारत के यह 5 चमत्कारिक मंदिर, जिसके रहस्य को आज तक वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए

हमारा भारत देश धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश माना जाता है हमारे देश में पुराने समय से ही पूजा-पाठ का चलन चलता आ रहा है पूजा स्थल के रूप में मंदिर विशेष महत्व रखते हैं भारत देश में ऐसे बहुत से मंदिर है जो अपने चमत्कार और अद्भुत रहस्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और इन चमत्कारों के प्रति लोगों की काफी आस्था देखने को मिलती है इन चमत्कार को देखने के बाद लोगों की आंखें खुली की खुली रह जाती है परंतु इन चमत्कारों के बारे में आज तक कोई भी पता नहीं लगा पाया है यहां तक कि इतनी प्रगति करने के बाद भी वैज्ञानिक भी इनके चमत्कारों के आगे फेल हो गए हैं यह भी इनके रहस्य के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं कर पाए हैं आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भारत के ऐसे 5 चमत्कारिक मंदिरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जो अपने चमत्कार के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है जिनके चमत्कारों को आज तक कोई नहीं जान पाया है।

आइए जानते हैं भारत के इन 5 चमत्कारिक मंदिरों के बारे में

कामाख्या मंदिर

भारत के राज्य असम में गुवाहाटी के पास स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में से सबसे प्रसिद्ध है परंतु इस मंदिर के अंदर देवी सती या माता दुर्गा की एक भी मूर्ति मौजूद नहीं है पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर देवी सती की योनि गिरी थी जो समय के साथ महान शक्ति साधनों का केंद्र बनी है ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के अंदर सबकी मनोकामना पूरी होती है इसलिए इस मंदिर को कामाख्या मंदिर कहा जाता है यह मंदिर 3 हिस्सों में बना हुआ है इसका पहला हिस्सा सबसे बड़ा है जहां पर हर व्यक्ति को जाने नहीं दिया जाता है दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां पर एक पत्थर से पानी निकलता रहता है ऐसा कहा जाता है की महीने में एक बार इस पत्थर से खून भी निकलता है ऐसा क्यों होता है इसके बारे में अभी तक किसी को भी नहीं मालूम है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

भारत में यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है मेहंदीपुर बालाजी का धाम भगवान हनुमान के 10 प्रमुख सिद्ध पीठों में गिना जाता है ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर हनुमानजी जागृत अवस्था में विराजमान है इस मंदिर के अंदर यह देखा गया है कि जिन व्यक्तियों के ऊपर भूत-प्रेत या फिर बुरी आत्माओं का साया रहता है यहां प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान के मंदिर में आते ही चीखने चिल्लाने लगते हैं और यह सभी आत्माएं पीड़ित के शरीर से बाहर निकल जाती है ऐसा क्यों होता है? इसके बारे में किसी को भी नहीं मालूम है इस मंदिर के अंदर लोग बुरी आत्माओं से छुटकारा प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से आते हैं इस मंदिर में रात में रुकना मना है।

काल भैरव मंदिर

भारत के मध्य प्रदेश के शहर उज्जैन से लगभग 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित भगवान काल भैरव का मंदिर है यह मंदिर काफी प्राचीन है परंपरा के अनुसार श्रद्धालु इनको प्रसाद के तौर पर सिर्फ शराब ही अर्पित करते हैं सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही शराब का प्याला काल भैरव की प्रतिमा के मुख पर लगाया जाता है वह एक पल में ही खाली हो जाती है।

ज्वालामुखी मंदिर

हिमाचल प्रदेश के कालीधार पहाड़ी के मध्य ज्वाला देवी का प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर स्थित है यह भी भारत के एक प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी माता सती की जीभ के प्रतीक के रूप में यहां धरती के गर्भ से लपलपाती ज्वालाएं निकली थी जो नौ रंग की होती है इन 9 रंगों की ज्वालाओं को देवी शक्ति का नौ रूप माना जाता है परंतु किसी को भी इस बात का पता नहीं है कि यह ज्वालाएं कहां से प्रकट हो रही है इनके रंग में भी परिवर्तन होता रहता है और यह क्यों होता है इसके बारे में भी किसी को नहीं मालूम है आज तक किसी को पता नहीं चल पाया कि यह प्रज्वलित कैसे होती है और यह कब तक जलती रहेगी ऐसा कहा जाता है कि मुस्लिम शासकों ने इस ज्वाला को बुझाने की पूरी कोशिश करी थी परंतु वह कामयाब नहीं हो पाए।

करणी माता मंदिर

भारत के इस मंदिर को चूहे वाली माता का मंदिर भी कहा जाता है यह मंदिर राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देशनोक शहर में स्थित है करणी माता इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी है जिनकी छत्रछाया में चूहों का साम्राज्य स्थापित है यहां पर मौजूद चूहे ज्यादातर काले रंग के हैं परंतु कुछ सफेद चूहे भी है ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति को सफेद चूहा नजर आ जाता है उसकी सभी इच्छाएं जरूर पूरी होती है और सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि चूहे बिना किसी को हानि पहुंचाए मंदिर के परिसर में इधर से उधर दौड़ते भागते खेलते कूदते रहते हैं वह लोगों के शरीर पर भी कूदते रहते हैं लेकिन किसी को कोई हानि नहीं पहुंचाते हैं इस मंदिर में चूहों की संख्या इतनी है कि आप यहां पर पैर उठाकर नहीं चल सकते हैं आपको यहां पर चलने के लिए पैर घसीटना पड़ेगा।