पाकिस्तान में दहशत – ट्रंप का एंजेडा – भारत से दोस्ती और आतंक परस्तों को सबक

नई दिल्ली सारे चुनावी सर्वेक्षण फेल हो गए और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बड़ा उलटफेर हो गया। रिपब्लिकन पार्टी के उम्‍मीदवार डॉनल्‍ड ट्रंप ने डेमोक्रैटिक पार्टी की उम्‍मीदवार हिलेरी क्लिंटन को 288-215 से हरा अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति बन गए। US-India friendship Lessons to terror.

भविष्य में इस चुनावी नतीजे से न सिर्फ वैश्विक समीकरण बदलने वाले हैं, बल्कि दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर भी व्यापक असर पड़ने वाला है। अब बड़ा सवाल ये है कि डॉनल्‍ड ट्रंप के राष्ट्रपति बन जाने के बाद भारत को फायदा होगा या नुकसान?

वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए ट्रंप की जीत नकरात्‍मक साबित होगी। और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की जीत से भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और पाकिस्तान प्रस्तावित आतंक को खत्म करने में मदद मिलेगी।

आइए जानते हैं कि ट्रंप बने राष्ट्रपति तो भारत को क्या होगा फायदा………

 

अमेरिका से क्या चाहता है भारत –   
पाकिस्तान को अलग – थलग :

सितंबर में जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण हो गई है। आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को अलग-थलग करना भी जरूरी है। जिसके लिए भारत का अमेरिका से लगातार सुरक्षा संबंधी बातचीत करना आवश्यक है। यह मसला दक्षिण एशिया के तेजी से बदलते सुरक्षा संबंधी माहौल के मद्देनजर और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

चीन के खिलाफ भारत का समर्थन:

जहां तक सुरक्षा का ताल्लुक है तो विवादित इलाकों जैसे कि उत्तर-पूर्व में अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पश्चिम में लद्दाख में चीन की बढ़ती दखलंदाजी भारत की चिंताएं बढ़ा रही है। साथ ही, बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच बढ़ता सहयोग भी भारत की चिंता का विषय बना हुआ है। यहां बताते चलें कि इस वक्त पाकिस्तान को उसके रक्षा साजो-सामान का करीब 63 फीसदी हिस्सा चीन की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में अमेरिका चीन पर लगाम लगाने के लिए भारत के साथ खड़ा हो। ऐसे में नई दिल्ली को लगता है कि दक्षिण एशिया में अमेरिका की मौजूदगी से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को उसके पक्ष में बनाए रखने में मदद मिलेगी।

सेना के आधुनिकीकरण और मेक इन इंडिया में मदद:

अमेरिका इस वक्त भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता भी हो चुका है। दोनों देशों के बीच 2015 में रक्षा साजो-सामान की आपूर्ति का कारोबार 14 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 934 अरब रुपए तक पहुंच चुका है। ऐसे में, भारत को अब अपने मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता के लिए भी अमेरिका से नजदीकी मदद की दरकार है। भारत सरकार यह भी अच्छी तरह जानती है कि अपनी सेना के आधुनिकीकरण का अभियान वह तब तक प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ा सकती, जब तक कि अमेरिकी हथियारों और उनसे संबंधित तकनीक तक उसकी पहुंच न हो जाए।

 

पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहते हैं ट्रंप –  

भारत होगा बेस्ट फ्रेंड : ट्रंप ने कहा कि अगर वे राष्ट्रपति बने तो भारत, अमेरिका का बेस्ट फ्रेंड बनेगा। 70 वर्षीय ट्रंप भारतीय-अमेरिकियों चैरिटी इवेंट में कहा, ‘ट्रंप प्रशासन के तहत, हम और अच्छे दोस्त बनने जा रहे हैं। मैं अच्छे को वापस लेता हूं। हम बेस्ट फ्रेंड बनेंगे। ट्रंप ने कहा कि एक साथ दोनों देशों को शानदार भविष्य होगा।

आतंकवाद के खिलाफ भारतीय मुहिम का समर्थन : ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम का भी समर्थन किया। उन्होंने इस्लामी आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल न करने को लेकर अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन की आलोचना करते हुए कहा, ‘हम इस बात की सराहना करते हैं कि हमारा अच्छा दोस्त भारत चरमपंथी इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ रहा है। भारत मुंबई धमाकों समेत आतंकवाद की क्रूरता देख चुका है। उन्होंने कहा, ‘वह एक ऐसी जगह है, जिसे मैं प्यार करता हूं और मैं समझता हूं।

ट्रंप का मानना है कि धर्म और नस्ल के आधार पर लोगों से निपटना ज़रूरी है ताकि अमरीका में आतंकवादी हमले रोके जा सकें। आमतौर पर ट्रंप का निशाना मुसलमानों पर रहता है।

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