अध्यात्म

किसने की थी गणेश चतुर्थी की शुरुआत ? जानिए खासतौर पर इस राज्य का है ये त्यौहार

आज पूरे भारत में गणेश चतुर्थी की धूम है. हर कहीं गणेश जी को विराजमान करके उनकी पूजा अर्चना की जा रही है, ऐसा लगने लगा है कि हर कोई बस गणपति बप्पा को ही पूजता है. अच्छी बात है गणपति बप्पा तो सबके हैं और हर किसी को उन्हें पूजने का हक है लेकिन इस पूजा के दौरान दूसरे लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है वो परेशानी का विषय है. खैर, हम बात कर रहे हैं कि गणेश उत्सव मनाने की प्रथा सबसे पहले किसने और क्यों शुरु की थी ? जैसा कि सभी जानते हैं कि गणेश चतुर्थी बड़ा उत्सव हमेशा से नहीं रहा है, जिस तरह हर भगवान का जन्म उत्सव मनाया जाता है उसी तरह गणेश भगवान का भी जन्मोत्सव मनाया जाने लगा लेकिन इसे विशाल पूजा और महाउत्वस का नाम देने वाले भारत के महाराष्ट्र के रहने वाले थे. किसने की थी गणेश चतुर्थी की शुरुआत ? ये बात हर उस शख्स को पता होनी चाहिए जो अपने घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करता है.

किसने की थी गणेश चतुर्थी की शुरुआत ?

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हर साल की तरह इस बार भी गणेश भगवान सभी के घर विराजमान हो चुके हैं और सभी उनकी पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं. भारत में इस त्यौहार की धूम महाराष्ट्र के अलावा आप यूपी, बिहार और मध्य-प्रदेश में देखेंगे. दक्षिण भारत में शायद ही किसी जगह पर मूर्ति स्थापित करके कोई इसकी धूम मचाता होगा. गणेश चतुर्थी के रंग हमने बॉलीवुड में बहुत देखे हैं जब फिल्मों से लेकर रियल लाइफ तक सितारे बप्पा के रंग में रंग जाते हैं. इस त्यौहार को 7 से 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिस दौरान पूरा महाराष्ट्र सजाया जाता है. मुंबई में तो ना जाने कितने गणपति के पंडाल लगाए जाते हैं जहां हर दिन ढोल-ताशे बजाए जाते हैं और बप्पा के आने का उत्सव मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी त्यौहार की सबसे पहले शुरुआत मुंबई में मराठा शासक शिवाजी ने की थी. वे गणेश भगवान के बहुत बड़े भक्त थे और उनके जन्मदिवस को हर साल अच्छे से मनाते थे लेकिन एक बार उन्होंने सोचा कि इस उत्सव को और धूमधाम से मनाया जाए, जिसमें राष्ट्रवादी भावनाएं उजागर हों और सांस्कृतिक सद्भाव को भी बढ़ावा मिले. फिर उन्होंने ही गणपति बप्पा मोरिया, मंगलमूर्ति मोरिया को पहली बार बोला और पूरे महाराष्ट्र में इस उत्सव को महाउत्सव के रूप में मनाने का ऐलान करवा दिया. उसके बाद से आज तक पूरी मुंबई इन 10 दिनों तक सजाया जाता है और सभी इस त्यौहार को बहुत ही धूम-धाम से मनाने लगे. हर साल इन 10 दिनों के लिए पूरे राज्य में मराठा संस्कृति और परंपरा देखने को मिलती है, जिसे देखने भारी संख्या में लोग दर्शन को पहुंचते हैं.

महाराष्ट्र के अलावा पिछले करीब 10 सालों से यूपी और बिहार में भी गणेश चतुर्थी की धूम देखने को मिल रही है. पहले यहां कोई-कोई इस त्यौहार को मनाता था लेकिन अब हर गली, हर नुक्कड़ पर गणेश जी को स्थापित करके कुछ आवारा लड़के हुड़दंग मचाते हैं. जिससे कि स्थानीय लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लोगों को परेशानी होती है तेज लाउडस्पीकर्स से और हर समय उनके शोर-शराबे से और अगर किसी ने कुछ बोल दिया तो भी वे मारने-काटने पर भी उतक जाते हैं. यूपी-बिहार से ये केस बहुत भारी मात्रा में सामने आते हैं.

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