इमरान खान बने पाकिस्तान के नवाब, जानियें कैसा है इनका सियासी करियर

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हाल ही में हुए चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख  इमरान खान ने आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री चुने गए हैं। इमरान खान पिछले 22 वर्षों से पाकिस्तान के सक्रिय राजनीति में हैं। आज पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री पद के रूप में उन्हें शपथ राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने दिलाई। इससे पहले शुक्रवार को जहां पाकिस्तानी संसद जिसमें कुल 342 सीटें हैं, जिसमें बहुमत के लिए 172 वोटों की जरूरत होती  है में इमरान खान ने अपने प्रतिद्वंदी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के प्रमुख शाहबाज शरीफ को मात देते हुए 176 वोट हासिल किए जबकि शाहबाज शरीफ को मात्र 96 वोट मिले। इस तरह से इमरान खान पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री चुन लिए गए।

इसी बीच इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के पूर्व क्रिकेटर और नेता नवजोत सिंह सिद्धू भी इस्लामाबाद पहुँचे । इनके अलावा इमरान खान के अन्य कई क्रिकेट साथी जैसे रमीज राजा और वसीम अकरम भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुँचे ।

 

इमरान खान क्रिकेटर से राजनेता– इमरान का जन्म 25 नवंबर सन 1952 को हुआ था। इमरान खान किक्रेटर के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। इसलिए उनके प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें पाकिस्तान का नया कप्तान बताया जा रहा है। इमरान खान का क्रिकेट इतिहास बहुत ही शानदार है। इमरान खान पाकिस्तान के लिए सफल तेज गेंदबाज हुए। उनके नाम टेस्ट और वनडे मिलाकर 548 विकेट हैं। वे अपने समय के सबसे तेज गेंदबाजों में से थे जिनका खौफ लगभग सभी बल्लेबाजों में था। इमरान खान पाकिस्तान क्रिकेट के कप्तान रहते, पाकिस्तान को 1992 का वर्ल्ड कप भी दिलाया और पाकिस्तान को क्रिकेट में विश्व पटल पर स्थापित किया। 1992 में ही क्रिकेट से रिटायर होने के बाद उन्होंंने चार साल तक सामाजिक कार्यों में सहयोग किया ।  और 1996 में अपनी खुद की नई राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ नामक पार्टी का गठन किया।

 

सिद्धू के पाकिस्तान पहुँचने से भारत की सियासत गरमाई– नवजोत सिंह सिद्धू ने इस्लामाबाद में हुए इमरान खान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने से भारत की राजनीति गरमा गई है। सिद्धू के पाकिस्तानी आर्मी चीफ से गले मिलने की बात से भाजपा  नाखुश नजर आ रही है और राहुल गांधी से सिद्धू का इस्तीफा मांगने को कह रही है। कहा जा रहा है कि यह भारत के लिए कूटनीतिक हार है। वहीं सिद्धू ने कहा है कि जितनी मोहब्बत वो लेकर आए थे उससे सौ गुना ज्यादा मोहब्बत लेकर जा रहे हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से गले मिलने पर भी भारतीय राजनीति में उथल पुथल मच रही है। अब देखना होगा कि सिद्धू पर पार्टी की ओर से कई कारर्वाई होती है या नहीं। क्योंकि भाजपा ने तो इसके खिलाफ कड़े तेवर अपनाए हैं।