महाभारत में हुए युद्ध के बाद इस स्त्री के क्रोध से भस्म हो सकते थे पांडव पुत्र भीम, आखिर कैसे हुआ बचाव ?

जब भी हम रामायण या महाभारत का नाम सुनते है तो हमारे दिमाग में दोनों ग्रन्थों को लेकर अलग ही धारणाये बनती है . जैसे कि रामायण में भगवान् राम के शांत चरित्र को दर्शाया गया है जब कि महाभारत में केवल कौरवों और पांडवों के युद्ध का ही बखान मिलता है . इसलिए इन दोनों ग्रंथों में बहुत बड़ा अंतर है . अब अगर हम महाभारत की बात करे तो उसमे भगवान् कृष्ण से लेकर द्रोपदी तक हर चरित्र ने सबको हमेशा से ही बहुत प्रभावित किया है . गांधारी अच्छे से याद ही होगा ये नाम ;

आपको महाभारत की वो घटना तो अच्छे से याद ही होगा जिसमे द्रोपदी का भरी सभा में अपमान किया गया था . जब ये घटना हुई थी तब भीम ने भी एक प्रतिज्ञा ली थी . हालांकि भीम के इस प्रतिज्ञा को पूरा करने के बाद महाभारत में एक स्त्री ऐसी भी थी जो भीम के खून की प्यासी बन चुकी थी और उसे भस्म करना चाहती थी . तो आप भी जानिए कि आखिर भीम की प्रतिज्ञा क्या थी और वो कौन स्त्री थी जो भीम को ही भस्म करना चाहती थी ?

how pandav son bhim save himself

भीम की प्रतिज्ञा .. महाभारत के एक खेल में जब सभी पांडव सब कुछ हारने के बाद अपनी संगिनी द्रोपदी को भी हार गए तब दुर्योधन ने बिना किसी डर के भरी सभा में द्रोपदी के चीर हरण का आदेश दिया था . उस समय पांडव भी कुछ नहीं कर पाए थे क्योंकि वे मज़बूर थे . पर जब दुर्योधन भीम की आँखों के सामने द्रोपदी को बालों से खींच कर ले जा रहा था तब भीम ने ये प्रतिज्ञा ली थी कि वो दुर्योधन और दुशासन के खून से द्रोपदी के बाल धोएगा . भीम ने महाभारत के युद्ध में अपनी प्रतिज्ञा पूरी भी की . ये युद्ध काफी लंबे समय तक चला . कुरुक्षेत्र में हुए इस महाभारत के युद्ध के बाद जब पांडव, कौरवो को खत्म करके और युद्ध में जीत कर गांधारी और धृतराष्ट्र के पास पहुंचे तब कुछ ऐसा हुआ जिससे सभी पांडव हैरान रह गए .

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गांधारी ने किया था भीम को भस्म करने का प्रयत्न..

एक माँ होने के कारण गांधारी पांडव पुत्र भीम से बेहद क्रोधित थी क्योंकि भीम ने ही गांधारी के पुत्र दुर्योधन को बलपूर्वक मारा था और माँ गांधारी को ये अन्याय लग रहा था . इसलिए वे अपने पुत्र के हत्यारे को नष्ट करना चाहती थी .

सब पांडव पुत्र डरते डरते माँ गांधारी के पास पहुंचे तो वो बहुत गुस्से में थी . इस स्थिति में भीम ने गांधारी से कहा कि यदि मैं दुर्योधन को नहीं मारता तो वो अधर्मी मुझे मार देता इसलिए धर्म की रक्षा करने के लिए ये जरुरी था .इसके बाद पांडव पुत्र युधिषिठर भी बात करने के लिए आगे आये . लेकिन बहुत कम लोग ये बात जानते है कि जब युधिषिठर आगे आये थे तब गांधारी की हल्की सी दृष्टि उसकी पट्टी से हट कर युधिषिठर के नाखुनो पर पड गयी और जिस वजह से युधिषिठर के नाख़ून एकदम काले पड गए थे . वो तो भीम का भाग्य अच्छा था कि उस समय वो गांधारी का आशीर्वाद लेने के लिए उनके पैरो में झुके हुए थे और इसलिए वो गांधारी की क्रोधित दृष्टि से बच गए वरना उस समय भीम पूरी तरह भस्म हो चुके होते .

माँ गांधारी के इस ज्वलित रूप को देख कर अर्जुन भगवान् कृष्ण के पीछे छुप गए और नकुल और सहदेव भी इधर उधर हो गए . वैसे भी कहते है न कि एक माँ की आह से बचना बहुत मुश्किल है . इसके बाद जब गांधारी का गुस्सा शांत हुआ तब सब पांडवो ने उनका आशीर्वाद लिया .

महाभारत की इस घटना के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे क्योंकि इसका जिक्र महाभारत में भी कही मुश्किल से हुआ होगा . यही वजह है कि हम आपको इसकी हर छोटी से छोटी घटना से रूबरू करवाना चाहते है .

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