यूपी में तोड़ी गयी बाबा साहेब की मूर्ति, समाजवादी सांसद का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश से एक और बड़ा मामला सामने आया है। जी हां, उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा अम्बेडकर का नाम बदले जाने के  विरोध में उपद्रवियों ने अंबेडकर की मूर्ति ही तोड़ दी, जिसके बाद से यह मामला बढ़ता ही जा रहा है। बता दें कि यूपी के इलाहाबाद में अंबेडकर की मूर्ति तोड़ने का मामला सामने आया तो समाजवादी पार्टी के सांसद नागेंद्र धरने पे बैठ गए आइये जानते हैं कि पूरा मामला क्या है?

हाल ही में यूपी सरकार द्वारा अंबेडकर का नाम बदला गया, जिसके बाद संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर का नाम अब भीमराव रामजी अंबेडकर हो गया है। इस पर खूब सियासत देखने को मिल रही है। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ विपक्ष नाखुश है, बल्कि पार्टी में भी बगावत के सुर देखने को मिल रहे हैं, ऐसे में सरकार ने सफाई दी कि अंबेडकर के नाम के साथ उनके पिता का नाम लगाना जरूरी है, जिसके बाद अब हर जगह अंबेडकर का नया नाम देखने को मिलेगा।
मामले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, ऐसे बेबुनियादी बहस को छेड़ने का काम करती है, जोकि सरासर गलत है। तो वहीं मायावती ने कहा कि बीजेपी का अंबेडकर के प्रति ये प्यार सिर्फ दिखावा और वोट बैंकिंग है। इतना ही नहीं, अंबेडकर के पोते तो इस मामले कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कर रहे हैं, उनका कहना है कि अंबेडकर के नाम के साथ छेड़छाड़ करने बेहद ही दुःखद खबर है, ऐसे में न्याय के लिए हम कोर्ट जाएंगे।
इलाहाबाद में अंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ समाजवादी पार्टी के सांसद नागेंद्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश का अपमान है, सरकार इस पे तुरन्त एक्शन लें, वरना उनका प्रदर्शन बढ़ जाएगा। शनिवार की सुबह से ही जमकर पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। प्रदर्शन कर रहे समाजवादियों में गुस्सा दो वजह है। जी हां, जिसमे पहली वजह बाबा साहेब की मूर्ति तोड़ी गयी, तो वहीं दूसरी वजह उनके नाम के छेड़छाड़ किया गया। ऐसे में देखना ये होगा कि सरकार इस मामले से कैसे निपट पाती है?
अंबेडकर की मूर्ति तोड़ने का यह पहला मामला नहीं है, यूपी के कई राज्यो में पहले भी अंबेडकर की मूर्ति तोड़ी चुकी है। याद दिला दें कि त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के बाद लेनिन की मूर्ति तोड़ी गयी थी, जिसके बाद से मूर्ति तोड़ने का मामला बड़े स्तर पे दिखाई दिया था। उस दौरान भी गांधी और अम्बेडकर की मूर्ति भी तोड़ी गयी थी।