रामायण में राम बने अरुण गोविल की बेटी है बहुत खुबसूरत, लेकिन एक्टिंग नहीं बल्कि करती है यह काम

अरुण गोविल की बेटी: आज पुरे देश में रामनवमी का पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का खास महत्व है। अगर बात टीवी जगत की करें तो श्रीराम का नाम आते ही सबसे पहले अरुण गोविल का चेहरा सामने घुमने लगता है। हो भी क्यों ना, क्योंकि टीवी पर सबसे पहले राम बनने वाले यही तो हैं। उस समय तो कुछ लोग इन्हें सच में श्रीराम समझने लगे थे। रामानंद सागर की रामायण से इन्हें काफी लोकप्रियता हासिल हुई थी।

बेटी पढ़ाई ख़त्म करके कर रही है जॉब:

अरुण गोविल इन दिनों एक्टिंग छोड़कर किसी और काम में बिजी हो गए हैं। आखिरी बार अरुण को एक भोजपुरी फिल्म बाबुल प्यारे में देखा गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1960 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था। इन्होने एक्ट्रेस श्रीलेखा से शादी की है। इनके दो बच्चे भी हैं बेटा अमल गोहिल और बेटी सोनिका गोहिल। आज अरुण गोहिल की बेटी के बारे में भी बात करेंगे। सोनिका अपनी पढ़ाई ख़त्म करके इस समय जॉब कर रही हैं। सोनिका 2016 से मुंबई में माइंड शेयर कंपनी में बतौर प्लानिंग एक्जीक्यूटिव जॉब कर रही हैं।

लोग खड़े हो जाते थे उस समय टीवी के सामने हाथ जोड़कर:

पहले वह मीडिया मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर पार्ट टाइम जॉब भी कर चुकी हैं। सोनिका ने अपनी पढ़ाई Universityऑफ़ Westminster से की है। सोनिका ट्वीटर पर बहुत ज्यादा एक्टिव रहती हैं और अक्सर वह अपनी एक्टिविटी ट्वीटर पर शेयर करती रहती हैं।

आपको बता दें अरुण गोविल श्रीराम के रोल में इतने ज्यादा पसंद किये गए थे कि शूटिंग के दौरान कई बार लोग असली राम समझकर दर्शन के लिए चले जाते थे। यह बात अरुण ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान बतायी थी। कुछ लोग टीवी पर यह शो शुरू होने से पहले हाथ जोड़कर सामने खड़े भी हो जाया करते थे।

कभी-कभी अरुण करते हैं प्रोडक्शन का काम:

आपको बता दें अरुण गोहिल को रामायण में श्रीराम के रोल के बाद फिर कभी कोई अच्छा काम नहीं मिला। लोगों ने इन्हें श्रीराम के अलावा किसी और रूप में देखना पसंद नहीं किया। इस वजह से इनका कैरियर बहुत जल्दी ही ख़त्म हो गया। अब हालत यह हो गयी है कि अरुण गोहिल ना ही टीवी पर नजर आते हैं और ना ही फिल्मों में दिखाई देते हैं। कभी-कभी अरुण प्रोडक्शन का काम करते हैं। रामायण में लक्ष्मण का रोल निभाने वाले सुनील लाहिड़ी के साथ मिलकर इन्होने अपनी एक प्रोडक्शन कम्पनी खोली है, जो दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाती है।

कभी नहीं सोचा था कि बनेंगे एक्टर:

स्कूल के दिनों से ही अरुण को नाटकों में काम करने का काफी शौक था, लेकिन इन्होने कभी एक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था। वह अपने भाई के साथ मेरठ से मुंबई काम सीखने के लिए आये थे। 1977 में इन्हें पहला मौका मिला और इन्होने फिल्म पहेली से अपनी शुरुआत की। इसके बाद अरुण की मुलाकात रामानंद सागर से हुई और इन्होने अपने सीरियल विक्रम-बेताल में रजा विक्रमादित्य का रोल दे दिया। जब रामानंद सागर ने रामायण बनाने के बारे में सोचा तो राम के रूप में इन्हें अरुण का ख़याल आया। इस वजह से अरुण टीवी के पहले राम बन गए।

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