बहुत ज्यादा मेहनत के बाद भी नहीं मिलती सफलता तो ध्यान रखें स्वामी विवेकानंद की ये बात

हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है, लेकिन ऐसा सबके साथ नहीं हो पाता है। सफलता प्राप्त करने के लिए हर व्यक्ति अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है। वह इसके लिए खूब मेहनत भी करता है, लेकिन वह सफल नहीं हो पाता है। कई बार कुछ लोग इससे बहुत ज्यादा निराश हो जाते हैं। निराशा में ही वह कई बार गलत फैसला भी कर लेते हैं। लेकिन स्वामी विवेकानंद के अनुसार लोगों को जीवन में धैर्य रखने की जरुरत है।

बहुत मेहनत करता हूँ लेकिन नहीं मिलती सफलता:

आपको बता दें स्वामी विवेकानंद की मेहनत और सफलता से जुडी हुई कई महत्वपूर्ण बातें हैं। इसके बारे में उनका एक बहुत चर्चित प्रसंग भी है। इस प्रसंग के अनुसार के बार की बात है। स्वामी विवेकानंद के आश्रम में एक व्यक्ति आया जो बहुत ही ज्यादा निराश था और काफी दुखी भी था। वह व्यक्ति आते ही स्वामी के पैरों में गिर गया और कहने लगा कि मैं अपने जीवन से बहुत ज्यादा दुखी हूँ। मैं बहुत मेहनत करता हूँ पर कभी सफलता नहीं मिलती है। व्यक्ति ने स्वामी विवेकानंद से पूछा कि आखिर भगवान ने मुझे ऐसा नसीब क्यों दिया है?

वापस आने के नाद चमक रहा था व्यक्ति का चेहरा:

आदमी ने कहा कि मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ और मेहनती भी हूँ, इसके बाद भी कामयाब नहीं हूँ। स्वामी विवेकानंद उस व्यक्ति की परेशानी को समझ चुके थे। उनके पास एक कुत्ता था। स्वामी जी ने उस व्यक्ति से कहा कि तुम कुछ दूर तक मेरे कुत्ते को सैर कराकर लाओ। उसके बाद मैं तुम्हारे सवाल का जवाब देता हूँ। पहले तो वह व्यक्ति स्वामी की इन बातों को सुनकर काफी हैरान हुआ, लेकिन फिर कुत्ते को लेकर निकल गया। जब कुत्ते को सैर कराकर व्यक्ति वापस आया तो स्वामी ने देखा कि अभी भी व्यक्ति का चेहरा चमक रहा था, जबकि कुत्ता काफी थका हुआ लग रहा था।

तुम्हारी मंजिल है तुम्हारे आस-पास ही:

स्वामी ने देखते ही पूछा कि यह कुत्ता बहुत ज्यादा थका हुआ लग रहा है जबकि तुम्हारे चेहरे पर चमक है। इसके जवाब में व्यक्ति ने कहा कि मैं तो अपने रास्ते पर चल रहा था, जबकि कुत्ता गली के सारे कुत्तों के पीछे भागता था और लड़कर वापस मेरे पास आ जाता था। हम दोनों के एक जैसा ही रास्ता तय किया है, लेकिन इस कुत्ते ने दौड़ लगाई है, इसलिए यह काफी थक गया है। विवेकानंद ने कहा कि तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर भी यही है। स्वामी ने कहा कि तुम्हारी मंजिल तुम्हारे आस-पास ही है।

ज्यादातर समय व्यक्ति देखता है दूसरों की गलतियाँ:

तुम्हारी मंजिल तुमसे ज्यादा दूर नहीं है, लेकिन तुम अपनी मंजिल पर जाने की बजे दुसरे लोगों के पीछे भागते हो। इसी वजह से तुम अपनी मंजिल से दूर हो जाते हो। यही बात लगभग हर मनुष्य पर लागू होती है। ज्यादातर लोग दूसरों की गलतियाँ देखते रहते हैं और उनकी सफलता से जलते हैं। अपने ज्ञान को बढाने की बजाय अहंकार में दूसरों को नीचा समझते हैं। इसी सोच की वजह से व्यक्ति अपना कीमती समय और क्षमता दोनों खो देता है और उसका जीवन बस संघर्ष बनकर रह जाता है। इसलिए अपने लक्ष्यों को दूसरों को देखकर तय ना करें बल्कि उसका चयन खुद ही करें।

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