चाणक्य के इन दोहों में छिपा है सेहत का गूढ़मंत्र, क्या आप जानते हैं इन्हें

प्राचीन काल में विद्वानों ने जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत सी नीतियों और तथ्यों का प्रतिपादन किया था, पर समय के साथ लोग इन तथ्यों को भूलते जा रहे हैं जबकि ये तथ्य आज भी हमारे लिए उतने ही कारगर हो सकते हैं । प्राचीन विद्वानों की बात करें तो चाणक्य भारतीय इतिहास में श्रेष्ठ स्थान रखते हैं.. उनके बताए गूढंमंत्र आज इक्कसवीं सदी में भी बेहद कारगर हैं। आज हम आपको चाणक्य के कुछ ऐसे ही नीति और तथ्यों के बारे में बता रहे हैं जिसका वास्तव में पालन किया जाए तो व्यक्ति सेहतमंद रहने के साथ जीवन में सफल भी हो सकता है।

दरअसल चाणक्य ने अपने नीतियों का प्रतिपादन करते हुए कुछ दोहों की भी रचना की है.. आज हम आपको चाणक्य के ऐसे ही दोहों के बारें में बता रहे हैं जिनमें स्वस्थ रहने वाले आहार और दुनिया की सबसे अच्छी औषधि का वर्णन किया गया है।

पानी है अमृत

वाणि अजीरण औषधि, जीरण में बलवान।

भोजन के संग अमृत है, भोजनांत विषपान।।

इस दोहे के जरिए चाणक्य कहते हैं कि जब तक भोजन पच ना जाये तब तक पानी नहीं पीना चाहिए ।भोजन करने से पहले और भोजन के दौरान पिया गया पानी भी अमृत के समान होता है पर वहीं भोजन के तुरंत बाद पिया गया पानी जहर होता है। इसलिए हमेशा खाना खाने के लगभग एक घंटे बाद ही पानी पिएं।

भोजन को कभी ना कहें ना

गुरच औषधि सुखन में, भोजन कहो प्रमान

चछु इंद्रिय सब अंग में, शिर प्रधान भी जान।।

इस दोहे में चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह सभी औषधियों में गुरच (गिलोय) प्रधान हैं उसी तरह सारे सुखों में भोजन प्रधान है.. साथ ही शरीर की सभी इंद्रियों में आंखें मुख्य हैं और सभी अंगों में मस्तिष्क प्रधान है। इस दोहे के जरिए चाणक्य ये सीख देते हैं कि खाने को कभी ना नहीं बोलना चाहिए। साथ ही अपनी आंखों का विशेष ख्याल रखना चाहिए और दिमाग को हमेशा तनावरहित रखना चाहिए।

मांस से अधिक पौष्टिक है घी

चूर्ण दश गुणों अन्न ते,ता दश गुण पय जान।

पय से अठगुण मांस ते तेहि दशगुण घृत मान।।

इस दोहे के जरिए चाणक्य मंतव्य है कि खड़े अन्न से दसगुना पौष्टिक होता है पिसा हुआ अन्न और पिसे हुए अन्न से दसगुना अधिक पौष्टिक होता है दूध। जबकि दूध से भी दसगुना अधिक पौष्टिक है मांस और… मांस से दसगुना पौष्टिक है घी।  इसलिए सेहतमंद रहने के लिए इन चार जीचों का सेवन जरूर करें।

घी से बढ़ती है पौरुष शक्ति

राग बढ़त है शाकते,पय से बढ़त शरीर।

घृत खाए बीरज बढ़े, मांस मांस गम्भीर।।

इस दोहे के जरिए चाणक्य ने वजन और रोग बढ़ने के कारण बताए गए हैं। चाणक्य कहते हैं कि शाक खाने से रोग बढ़ता है जबकि दूध पीने से शरीर बनता है। वहीं घी खाने से वीर्य में वृद्धि होती है और मांस खाने से मांस बढ़ता है। इसलिए शरीर बनाने के लिए खूब दूध पिएं और पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए घी का सेवन करें और शरीर में चर्बी बढ़ाने के लिए मांस का सेवन करें। पर अगर शरीर में पहले से ही काफी मांस है तो मांस का सेवन ना करें क्योंकि ये शरीर में अतिरिक्त वसा बढ़ाता है।

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