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सपा नहीं बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकते हैं नरेश अग्रवाल

नरेश अग्रवाल का सपा पार्टी छोड़कर जाना भले ही समाजवादी के लिए एक झटका माना जा रहा है, लेकिन अगर यूपी के सियासत पर सही से नजर घुमाया जाए, तो यही लगात है कि नरेश बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकते हैं, क्योंकि नरेश लगातार विवादित बयान देते रहते हैं, ऐसे में बीजेपी नरेश को कैसे अपने रंग में ढालेगी ये तो खैर वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल की सच्चाई तो यही है कि नरेश का रंग भगवा हो गया है। बताते चलेंं कि नरेश अग्रवाल सियासत के उन माहिर खिलाड़ियों में से एक हैं, जो वक्त की नजाकत को समझते हुए पार्टी बदलते और छोड़ते हैं, ऐसे में इनकी छवि दलबदलू नेता की है।

सपा के पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल का पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने से यूपी की सियासत का रूख ही मुड़ गया। बता दें कि नरेश अग्रवाल के जाने से सपा काफी खुश नजर आ रही है, क्योंकि जानकारों की माने तो नरेश के पास न तो अपना कोई वोट बैंक हैं और न ही उनकी खास छवि है, ऐसे में अखिलेश का जया बच्चन को राज्यसभा भेजने का फैसला काफी हद तक सही माना जा रहा है। तो चलिए अब आपको हम नरेश के राजनीतिक करियर से रूबरू कराते हैं…

बता दें कि नरेश ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत कांग्रेस पार्टी से की थी, जिसके बाद वो 1998 में मुलायम की पार्टी में शामिल हो गये, इसके बाद 2007 में वो मायावती की पार्टी में शामिल हो गये, क्योंकि उस दौरान उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी। इसके बाद नरेश अग्रवाल 2012 में सपा पार्टी में फिर शामिल हुए, क्योकि उस समय सूबे में अखिलेश की सरकार थी, लेकिन अब जब पिछले एक साल अखिलेश सत्ता से बाहर हुए तो अब नरेश ने सपा का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा। इसके आधार पर यही कहा जा सकता है कि नरेश अग्रवाल एक अवसरवादी नेता हैं, जिसकी वजह से वो सूबे में चाहे किसी की भी सत्ता क्यों न रही है, वो हमेशा से ही पावर में रहते हैं।

बीजेपी में आते ही दिया विवादित बयान, फिर आएं बैकफुट पर

बीजेपी में शामिल होते ही नरेश अग्रवाल ने विवादित बयान दिया, जिसकी वजह से न सिर्फ विपक्षियों ने विरोध किया बल्कि बीजेपी नेताओं ने भी आड़े हाथों लिया। दरअसल, नरेश अग्रवाल ने बयान दिया था कि एक नाचने वाली यानि जया के लिए समाजवादी पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज किया, जिसकी वजह से वो नाराज होकर बीजेपी में शामिल हुए। लेकिन जब नरेश ने देखा कि उनके बयान पर विवाद बढ़ता ही जा  रहा है, तो उन्होंने मंगलवार सुबह को मामले में दुख जताया।

अखिलेश को नहीं बीजेपी को भारी पड़ेंगे नरेश

नरेश की छवि दलबदूल नेता की छवि है, ऐसे में नरेश अग्रवाल के पार्टी से जाने सपा में खुशी की लहर होने के साथ एकजुटता भी देखी जा सकती है, क्योंकि पार्टी में कुछ लोग नरेश के पद से नाखुश थे, जिसकी वजह से वो अखिलेश से भी नाखुश थे, ऐसे में अब वो लोग भी अखिलेश के खेमें में आ जाएंगे, जो नरेश को लेकर पार्टी से दरकिनार हुए थे। हालांकि, सपा को एक नुकसान ये हुआ कि नरेश राज्यसभा में पार्टी की बात को बड़ी ही मजबूती के साथ रखते थे, लेकिन अब पार्टी के पास कोई ऐसा नेता नहीं है।

वहीं अगर दूसरी तरफ बात बीजेपी की जाए तो बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। क्योंकि नरेश अग्रवाल सार्वजनिक मंच पर भी बीजेपी को खड़ी खोटी सुना चुके हैं, ऐसे में बीजेपी को हर वक्त नरेश अग्रवाल को लेकर मुंह की खानी पड़ेगी, जोकि पार्टी हित में नहीं  है। इतना ही नहीं, नरेश अग्रवाल के पार्टी में आने से बीजेपी कार्यकर्ता नाराज हैं, ऐसे में यह भी बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकती है, क्योंकि कार्यकर्ता को नाखुश करने से पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

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