मुकेश अंबानी से कई गुना दौलतमंद था ये शख्स, आज परिवार जी रहा है ऐसी जिन्दगी

कहते हैं दौलत और शोहरत बहुत बेवफा होती हैं, कभी इसके साथ रहती हैं तो कभी उसके साथ। ऐसा हम इस लिए कर रहे हैं क्योंकि हिन्दुस्तान के राजा के साथ ऐसा ही हुआ। जो कभी अर्श में था आज वो फर्श की धूल फांक रहा है। जी हां आज हम ऐसे ही राजा की बात करने जा रहे हैं जिसके पास आजाद हिन्दुस्तान से दोगुनी जायदाद थी, संकट के समय देश को पांच हजार किलो सोना दान किया था। लेकिन आज न तो उतनी दौलत रही और न शोहरत आज उसका परिवार देश छोड़कर दूसरे देश में गरीबी और मुफलिसी की जिंदगी जी रहा है।

जी हैं जिसकी हम बात कर रहे हैं उसका नाम है निजाम उस्मान अली खान, जो हैदराबाद के आखिरी निजाम थे। 6 अप्रैल, 1886 को पुरानी हवैली, हैदराबाद में पैदा हुए उस्मान अली खान के पिता का नाम महबूब अली खान था, जिनकी मौत 29 अगस्त 1911 को हुई थी। बताया जाता है किसी जमाने में उस्मान अली खान दुनिया के सबसे अमीर आदमी थे। 20 वीं शताब्दी तक, उस्मान अली खान के पास लगभग 200 मिलियन का सोना और चांदी था, 400 मिलियन के गहने थे।

पचास रोल्स रॉयस गाड़ियां थी

इतना ही नहीं गाडियों के शौकीन उस्मान अली खान के पास 1912 में करीब 50 रोल्स रॉयस गाड़िया थी। जिसमें खास बार्कर कोच की बनाई गयी रोल्स रॉयस सिल्वर भी है। कहा जाता है उस्मामन अली को देश में कई नामों से जाना जाता था। जैसे रुस्तम-ई-दौरान, अरस्तु-ई-ज़मान, वाल मामलुक, निज़ाम उद दौला नवाब मीर सर ओस्मान अली खान बहादुर, निज़ाम ऑफ़ हैदराबाद आदि। उस्मान हैदराबाद के आखिरी निजाम थे। जिनका इंतकाल 29 फरवरी 1967 को हुआ था।

भारत से दोगुनी थी अर्थव्यवस्था

टाइम और फॉर्च्यून जैसी मैगजीन के मुताबिक 1940 में उस्मामन अली खान की कुल संपत्ति करीब 2.36 अरब डॉलर थी। जो की की अमेरिका की अर्थ व्यवस्था का दो फीसदी थी। वहीं आजाद भारत की कुल अर्थ व्यवस्था निजाम से आधी थी। इसका मतलब ये हुआ की। करीब एक अरब डॉलर मात्र। जब चीन के साथ भारत का युद्ध हुआ उस वक्त उन्होने भारत सरकार को पांच हजार किलो सोना देकर मदद की थी।

हीरे को पेपर वेट की तरह करते थे इस्तेमाल

नवाबों और निजामों के पास धन तो था ही साथ ही उसका उपयोग भी पूरी शानोशौकत के साथ करते थे। कहा जाता है निजाम उस्मान 1340 करोड़ रुपए के हीरे का इस्तेमाल पेपरवेट के रूप में करते थे। इनको मोतियों और घोड़ों का भी बेहद शौक था। हैदराबाद के निजाम का शासन 31 जुलाई, 1720 को शुरू हुआ था। पहले निजाम मीर कमारुद्दीन खान थे, और उस्मान अली खान इस डाइनेस्टी के आखिरी निजाम।

बेहद कंजूस थे उस्मान अली खान

आखिरी निजाम उस्मान अली को लोग बेहद कंजूस भी करते है। एक कहानी के अनुसार निजाम उस्मान ने अपनी लाइफ में 35 साल तक एक ही टोपी पहनी। साथ ही कपड़े भी कभी प्रेस नहीं करवाते थे। उनके दस्तरखान में टीन की प्लेटें थीं, और बहुत ही सस्ती सिगरेट पीते थे। कहा जाता है, कि निजाम उस्मान ने पूरी जिन्दगी में कभी सिगरेट का पूरा पैकेट नहीं खरीदा।

गुमनाम जिंदगी जी रहे निजाम के वारिस

मुकर्रम जहां

निजाम उस्मान की मौत के बाद उनके परिवार का बुरा दौर शुरु हो गया। उस्मान अली खान ने किसी बेटे को अपना वारिस नहीं बनाया। बल्कि पूरी दौलत का वारिस नाती मुकर्रम जहां को बनाया। मुकर्रम की मां तुर्की की ही रहने वाली थीं। साथ ही मुकर्रम की शादी पूर्व मिस तुर्की से हुई थी। इसलिए  मुकर्रम जहां भी तुर्की के इस्तांबुल के एक फ्लैट में रह रहे हैं। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया में रहते थे। गरीबी और मुफिलीसी का आलय ये था की एक समय वकील की फीस देने के लिए भी पैसे नहीं थे।

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