अध्यात्म

मुस्लिम अफसर के कहने पर बनवाया गया यह चमत्कारी हनुमान मंदिर,यहाँ 2024 तक के किये भंडारे हैं बुक

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है। वैसे तो हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। लेकिन कुछ ऐसे देवता भी हैं, जिनकी पूजा सबसे ज्यादा की जाती है। उन्ही में से एक हैं हनुमान जी। इनके बारे में कहा जाता है कि माता सीता से इन्हें अमरत्व का वरदान मिला था। यही वजह है कि हिन्दू देवताओं में हनुमान जी ही एक ऐसे हैं जो अभी तक जीवित हैं। कलयुग में हनुमान जी ही सबसे पहले भक्तों की पुकार सुनते हैं।

हो जाती है भक्तों की सभी परेशानियाँ दूर:

ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन में कोई भी परेशानी बाकी नहीं रह जाती है। व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है और उसे हर चीज की प्राप्ति होती है। हनुमान जी की पूजा से कुंडली दोष और शनि के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिल जाती है। यही वजह है कि मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लग जाती है। पुरे देश में हनुमान जी के कई चमत्कारी मंदिर हैं, जहाँ जाने भर से भक्तों की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं।

मंदिर को माना जाता है बहुत चमत्कारी:

आज हम आपको हनुमान जी के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ जाने से व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियाँ हमेशा के लिए दूर हो जाती है। हम बात कर रहे हैं कोटद्वार में स्थित सिद्धबली हनुमान मंदिर की। हनुमान जी के इस मंदिर को बहुत चमत्कारी माना जाता है। यहाँ की मान्यता के अनुसार जिन भक्तों की मनोकामनाएं हनुमान जी पूरी करते हैं, वह यहाँ पर भंडारा करवाते हैं। यहाँ आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। हनुमान जी के भक्तों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यहाँ होने वाले भंडारों की 2024 तक की बुकिंग पहले ही हो चुकी है।

हनुमान जी से सिद्धि प्राप्त थी बाबा को:

सिद्धबली हनुमान जी का मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी क्षेत्र के कोटद्वार में स्थित है। इसे पौड़ी का द्वार भी माना जाता है। यह क्षेत्र पहाड़ की तराई में खोह नदी के किनारे बसा हुआ है। कोटद्वार के बाद पहाड़ी इलाका शुरू हो जाता है। कोटद्वार से लगभग 3 कोलोमीटर दूर ही राजमार्ग है। खोह नदी के किनारे पर लगभग 40 मीटर ऊँचे टीले पर यह प्रसिद्द हनुमान मंदिर स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि बहुत समय पहले एक बाबा इसी टीले पर हनुमान जी की पूजा किया करते थे। हनुमान जी ने उन्हें दिव्य सिद्धि प्रदान की हुई थी। यही वजह है कि बाबा को सिद्धबली बाबा कहा जानें लगा।

मुस्लिम अफसर के कहने पर बनवाया गया मंदिर:

बाबा ने ही हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की थी। एक मान्यता के अनुसार ब्रिटिश शासनकाल में एक मुस्लिम अफसर यहाँ से गुजर रहा था। उसी समय वह सिद्धबली मंदिर पर रुका था। उस अफसर को सपना आया कि सिद्धबली बाबा की समाधी के पास ही मंदिर बनवाया जाए। यह बात उस मुस्लिम अफसर के लोगों को बताई और मंदिर बनवाया गया। पहले यह मंदिर छोटा था लेकिन श्रद्धालुओं ने इस मंदिर को धीरे-धीरे काफी भव्य बनवा दिया। यहाँ व्यक्ति की मन्नत पूरी हो जाने के बाद भंडारा करवाया जाता है। यहाँ हर मंगलवार और शनिवार को भंडारा करवाया जाता है। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्होंने 2024 तक के लिए भंडारे की बुकिंग करवा ली है।

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