शिवरात्रि स्पेशल: क्या आप जानते हैं भगवान शिव के दो नहीं छह पुत्र थें

भगवान शिव की महिमा तो सभी जानते हैं.. देवो के देव महादेव के भक्त उनके हर रूप और अवतार से परिचित हैं .. हम सब बचपन से भगवान शिव और मां पार्वती के बारे में कई सारी पौराणिक कथाएं सुनते आ रहे हैं.. साथ ही लोग इनके पुत्र गणेश जी, कुमार कार्तिकेय से भी परिचित हैं लेकिन क्या आपको पता है ..भगवान शिव के दो नहीं बल्कि 6 पुत्र थें। जी हां, शायद आप ये पहली बार सुन रहे हों पर ये सत्य है और आज हम आपको गणेश जी और कुमार कार्तिकेय के अलावा भगवान शिव के अन्य चार पुत्रों के बारे में बता रहे हैं।

अयप्पा: अयप्पा दक्षिण भारत के विख्यात देव हैं .. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयप्पा भगवान शिव और माता मोहिनी के पुत्र हैं। दरअसल पौराणिक कथा की माने तो भगवानअयय्पा का जन्म तब हुआ था जब समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा के रूप में जाना जाता है। साथ ही भगवान शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण उनको ‘हरिहरपुत्र’ भी कहा जाता है। दक्षिण भारत के राज्य केरल में शबरीमला में अयप्पा स्वामी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां विश्वभर से श्रद्धालु भगवान शिव के इस पुत्र के मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं।

सुकेश: वहीं पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के एक दूसरे पुत्र था सुकेश जो कि विदुय्त्केश और सालकंठकटा नाम के दंपत्ति का पुत्र था पर इस दम्पति ने इसे लावारिस छोड़ दिया था। ऐसे में शिव-पार्वती ने सुकेश का लालन-पालन किया था।

भूमा: साथ ही शिव का एक तीसरे पुत्र भूमा का भी पुराणों में जिक्र मिलता है जिसके बारे में कहा जाता है कि उसका जन्म शिव के पसीने की एक बूंद से हुआ था। दरअसल पौराणिक कथा के अनुसार एक समय कैलाश पर्वत पर भगवान शिव तपस्या में लीन, उस समय उनके माथे से तीन पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। इन्ही बूंदों से पृथ्वी ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, जिसकी चार भुजाएं और और वय रक्त वर्ण का था। कथा के अनुसार इस पुत्र का पालन पोषण पृथ्वी ने ही किया और इसीलिए भूमि का पुत्र होने के कारण ये भूमा कहलाया। कहा जाता है कि कुछ बड़ा होने पर ये मंगल काशी पहुंचा और भगवान शिव की कड़ी तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मंगल लोक प्रदान किया।

जलंधर: सुकेश, अयप्पा और भूमा के अलावा भगवान शिव का चौथा पुत्र जलंघर था । पौराणिक कथा की माने तो जलंधर का जन्म तब हुआ था जब एक बार भगवान शिव ने अपने शरीर से निकल रहे तेज को समुद्र के जल में फेंक दिया और इससे ही जलंधर का जन्म हुआ। कहा जाता है कि जलंधर में अपार शक्ति थी और उसकी इस असीम शक्ति का कारण थी उसकी पत्नी वृंदा। दरअसल वृंदा के सतीत्व के कारण सभी देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में जलंधर अपने शक्तिशाली होने के अभिमान में चूर होकर तीनो लोक में उत्पात मचाने लगा ऐसे में उसका वध भी भगवान शिव के हाथो ही हुआ  ।

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