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साक्षर में सबसे आगे फिर भी क्यों शुरू हो रहा है केरल में साक्षरता अभियान

केरल: केरल भारत का सबसे ज्यादा शिक्षित राज्य माना जाता है, लेकिन एक बार फिर से केरल में साक्षरता अभियान की शुरू होने जा रहा है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर क्या जरूरत है इस अभियान की? बता दें कि 1991 में ही केरल को भारत का सबसे ज्यादा शिक्षित राज्य घोषित कर दिया गया था तो फिर क्यों अब इस अभियान को शुरू किया जा रहा है। चलिये देखते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

बता दें कि इस अभियान के पीछे का मकसद यह कि केरल को 100% साक्षर बनाया जाये। वाकई केरल सरकार का यह सराहनीय कदम है। केरल सरकार के इस कदम से देश के अन्य राज्यों को भी सीख लेना चाहिए। बता दें कि 1991 में ही केरल में साक्षरता दर 90% थी, जिसके बाद यह लगातार बढ़ती गई। लेकिन अगर केरल की बात छोड़ दी जाए तो अन्य राज्योंं में साक्षरता बस नाम भर की  छलकती है।

बताते चले कि इस समय 2011 का जनगणना के मुताबिक केरल में साक्षरता की दर 94% पहुंच चुकी है। ऐसे में केरल सरकार का कहना है कि वो केरल को पूर्ण शिक्षित राज्य बनाएगी, जिसके लिए उसने एक बार फिर साक्षरता अभियान को शुरू करने का फैसला किया है।

जी हां, यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक केरल 18 अप्रैल, 1991 को ही पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो चुका है। बता दें कि यूनेस्को के नियम के अनुसार अगर किसी देश या राज्य की 90 फीसदी जनसंख्या साक्षर है तो उसे पूर्ण साक्षर मान लिया जाता है। तो इसी आधार पर केरल को पूर्ण शिक्षित राज्य कहा जा सकता है, लेकिन सरकार का मानना है कि अभी भी 5% लोग शिक्षित नहीं है, जिसके लिए सरकार उपयोगी कदम उठाने को तैयार है।

दरअसल, साल 2011 की जनगणना में जो नए आंकड़े आए उससे यह पता चलता है कि ऊंची साक्षरता दर और स्कूल ड्रॉपआउट रेट बेहद कम होने के बावजूद केरल में 18 लाख लोग निरक्षर हैं, जिसकी वजह से सरकार की नींद उड़ चुकी है। खैर, जो भी केरल सरकार के इस कदम से बाकि राज्यों ंकी सरकारों को भी जरूर सीख लेना चाहिए।

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