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यह है एशिया का सबसे बड़ा गाँव, जहाँ के हर घर से निकलता है देश की रक्षा करने वाला एक फौजी

धीरे-धीरे आधुनिकता बढ़ने के साथ ही गांवों के ढांचे में भी बदलाव आया है। आज के आर्थिक युग में किसानों की हालत बुरी होती जा रही है, इस वजह से वो गाँव से शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। पहले के समय में देश की ज्यादातर आबादी गांवों में ही रहती थी, क्योंकि वहाँ जीवन जीने की सभी सुविधाएँ मौजूद थी। लेकिन आज लोगों की जरूरतें बढती जा रही हैं। इस वजह से लोग नौकरी की तलाश में गांवों को छोड़कर लगातार शहर आ रहे हैं। इस वजह से गाँवों का आकार भी धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है।

लेकिन आज भी एक गाँव है, जिसे एशिया के सबसे बड़े गाँव का दर्जा मिला हुआ है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के गहमर गाँव की। इस गाँव की कुल आबादी 1 लाख 20 हजार से भी ज्यादा है। इस गाँव की सबसे ख़ास बात यह है कि इस गाँव के हर घर से कोई ना कोई व्यक्ति सेना में है। इस गाँव के बारे में कहा जाता है कि इसे 1530 में कुसुम देव राय ने सकरा डीह नमक जगह पर बसाया था।

गहमर गाजीपुर शहर से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ एक रेलवे स्टेशन भी है जो पटना और मुग़ल सारे से जुड़ा हुआ है। इस गाँव के लगभग 12 लोग भारतीय सेना में जवान के पद से लेकर कर्नल के पद पर तैनात हैं। इस गाँव में 15 हजार से भी ज्यादा भूतपूर्व सैनिक हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसा हुआ यह गाँव 8 वर्गमील में फैला हुआ है। लगभग 1 लाख 20 हजार आबादी वाला यह गाँव 22 पट्टी और टोलों में बंटा हुआ है।

पहले विश्व युद्ध से लेकर 1965 और 1971 सभी लड़ाइयों में इस गाँव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों की फ़ौज में 228 सैनिक इस गाँव के शामिल थे। इनमे से 21 सैनिक मारे गए थे। उन सैनिकों की याद में गाँव में एक शिलालेख भी लगा हुआ है। गाँव के युवक गाँव से कुछ ही दूरी पर गंगा तट के किनारे सेना में जाने की तैयारी भी करते हैं। इस गाँव के युवकों की सेना में जानें की परम्परा की वजह से ही यहाँ हर साल सेना भर्ती कैम्प लगाती थी।

लेकिन इसको 1986 में बंद कर दिया गया। अब इस गाँव के युवक भी देश के कोने-कोने में होने वाली सेना की भर्तियों में शामिल होने के लिए जाते हैं। भारतीय सेना ने गहमर गाँव के लोगों के लिए सैन्य कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई थी। इस कैंटीन के लिए बनारस की कैंटीन से सामान हर महीने भेजा जाता था। लेकिन पिछले कई सालों से यह बंद कर दी गयी है। यह गाँव बहुत ज्यादा आधुनिक है और यहाँ शहर जैसी सुविधाएँ हैं।

गाँव में टेलीफोन एक्सचेंज, डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र जैसी सारी सुविधाएँ मौजूद हैं। इस वजह से गाँव के लोगों को किसी भी काम के लिए शहरों में जानें की जरुरत ही नहीं पड़ती है। यहाँ के पुरुष ही नहीं महिलाएँ भी अब इस कदर इसके लिए आदि हो गयी हैं कि किसी भी आपदा या विपदा के समय घर के पुरुषों को जानें से नहीं रोकती हैं। महिलाएँ पुरुषों को प्रोत्साहित करके उन्हें भेजती हैं। गहमर स्टेशन पर रुकने वाली लगभग हर गाड़ी से कोई ना कोई सैनिक उतरता ही है। कभी कभी यह स्टेशन छावनी में भी तब्दील हो जाता है।

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