8 जनवरी: कालअष्टमी के दिन ऐसे करें पूजा, जीवन की हर समस्या से मिल जाएगी मुक्ति

सनातन धर्म में वैसे तो हर माह की कृष्ण पक्ष के अष्टमी को कालाष्टमी मनाई जाती है पर माघ माह की अष्टमी विशेष सिद्धीदायी मानी जाती है.. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने दुष्टों और पापियों को सजा देने के लिए रौद्र रुप धारण किया था। ऐसे में इस दिन कालभैरव के साथ पूर्वजों की स्तुति की जाती है, कालभैरव की पूजा से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है जिससे व्यक्ति के सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस बार ये कालाष्टमी 8 जनवरी को है ऐसे में हम आपको इस दिन पूजन और आराधना की सही विधि बताने जा रहे हैं ताकि आप भी इस अवसर का सही उपयोग कर और जीवन के कष्टों से मुक्ति पा सकें।

असल में पौराणिक मान्यताओं की माने तो भगवान शिव के दो रुप हैं एक बटुक भैरव तो दूसरा काल भैरव। बटुक भैरव जहां अपने भक्तों को सौभाग्य प्रदान करते हैं और वहीं दूसरी तरफ काल भैरव दुष्टों और अपराधियों को उचित दंड देते हैं और मनुष्य को अभयता प्रदान करते हैं.. ऐसे में इस दिन व्रत और विधि विधान से पूजा करने से घर में कभी किसी बुरी नजर का साया नहीं पड़ता है और भूतप्रेत दूर भाग जाते हैं। जिसके साथ ही कि व्यक्ति से जीवन से दुखों और क्लेश का भी नाश हो जाता है। चलिए जानते हैं इस दिन पूजा की सही विधि..

कालष्ट्मी के दिन प्रातः स्नान करने के बाद पूरे दिन व्रत रखना होता है और फिर आधी के रात के समय पूजा की जाती है। रात्रि के समय भगवान शिव और माता पार्वती की कथा और भजन-कीर्तन करना चाहिए। इसके बाद अर्धरात्रि के समय धूप, दीप, गंध, काले तिल, उड़द, सरसों के तेल के साथ काल भैरव और देवी कालिका की स्तुति का जाती है। साथ ही कालाष्टमी की रात को जागरण किया जाता है जिसमें भैरव तंत्रोक्त, बटुक भैरव कवच, काल भैरव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए । इस तरह पूरी विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की हर समस्याओं का निदान होता है। इसके अलावा कालाष्टमी के दिन राहु की शांति के लिए भी पूजा को उचित माना जाता है।

चूंकि भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है, इसलिए कालाष्टामी के दिन भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए कुत्ते को भोजन करवाना शुभ और फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त सनातन धर्म में प्रचलित मान्यता के अनुसार कालाष्टामी के दिन सुबह के समय किसी पवित्र नदी में स्नान कर अपने पितरों का श्राद्ध व तर्पण करना चाहिए। इस तरह पूरे मन और शुद्ध आचरण से जो व्यक्ति ये सभी कार्य करते हैं, उनके जीवन के दुखों और कष्टों का नाश होता है और उनका भाग्योदय होता है।

इस बार 8 जनवरी, सोमवार के दिन दोपहर 2.50 के बाद मध्यांह व्यापिनी अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है। ऐसे में बताई गई विधि से आप काल भैरव और देवी कालिका का पूजन अवश्य करें। कालभैरव की पूजा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत का भय खत्म हो जाता है।

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