लोगों की आँखें उस समय भर आयी जब ढ़ाई साल की नन्ही बच्ची ने अपने शहीद पिता को दी मुखाग्नि, जानें

राजस्थान: पाकिस्तान की क्रूर नीतियों की वजह से ना जानें कितने ही घर के लोग बेसहारा हो जाते हैं। कितनी माँ की कोख सूनी हो जाती है तो कितनी ही बीबियों के सुहाग उजाड़ जाते हैं। साथ ही कई बच्चों के सर से बाप का साया छीन जाता है। दोनों देशों की इस जंग में भारतीय सैनिक तो बलिदान दे ही रहे हैं, साथ ही उनका परिवार भी बलिदान दे रहा है। हर साल ना जानें कितने ही भारतीय सैनिक शरहद की रक्षा करते हुए शहीद हो जाते हैं।

हाल ही में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए चुरू के गौरीसर गाँव के जवान राजेंद्र नैण के पार्थिव शरीर के साथ पुरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। भारतीय परम्परा के अनुसार श्मशान घाट पर लड़कियों को नहीं जानें दिया जाता है लेकिन शहीद के परिवार से बड़ा फैसला लेते हुए ढ़ाई साल की बेटी मिष्ठी से अपने पिता को मुखाग्नि दिलवाई गयी। उस समय यह नजारा देखकर वहाँ मौजूद सभी लोगों की आँखें नम हो गयी थी।

आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि राजेंद्र नैण मात्र 26 साल के थे और 2 साल पहले ही सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। मंगलवार को सुबह उनके पार्थिव शरीर को उनके पैत्रिक गाँव गौरीसर लाया गया। शहीद जवान के घर का माहौल पहले ही काफी गमगीन था। उनकी पत्नी अपनी बेटी के साथ मायके में थी। मंगलवार को वह भी सुसराल पहुँची। जैसे ही उन्होंने पति के शव को देखा, बेहोश हो गयी। शहीद जवान का एक साल का एक बेटा भी है। शोक सन्देश पढ़ते हुए उपखंड अधिकारी संजू पारीक भी भावुक हो गए।

सुबह जब शहीद जवान की शव यात्रा निकाली गयी तो हजारों की संख्या में ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि शहीद की शव यात्रा में शामिल हुए। लोगों के मन में पाकिस्तान के खिलाफ खूब गुस्सा देखा गया। सीआरपीएफ डीआइजी जगदीश मीणा ने कहा कि आतंकवादियों के हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया गया। इस दौरान आतंकियों से लड़ते हुए जवान राजेंद्र शहीद हो गए। राजेंद्र की शहादत पर पुरे देश को गर्व है। देश के युवाओं में वतन के लिए ज़ज्बा है जो कभी कम नहीं होगा।