All News, Breaking News, Trending News, Global News, Stories, Trending Posts at one place.

जानिये मरने के बाद लोग क्यों जल्द से जल्द जला देना चाहते हैं मृतक की लाश, वजह जानकर चौंक जाएंगे

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो लोग इस जल्दी में रहते हैं कि जल्द से जल्द उस व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया जाए. विशेष परिस्तिथियों को छोड़कर लोग यह काम जल्दी निपटाना चाहते हैं. लेकिन व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए घरवालों से ज्यादा जल्दी आस-पड़ोस के लोगों को होती है. ये बात आपने भी नोटिस की होगी. लेकिन ऐसा क्या होता है कि मौत के बाद लोग जितनी जल्दी हो सके मृतक शरीर को जला देना चाहते हैं? क्यों वह इस काम में ज्यादा विलंब नहीं करना चाहते? इसके पीछे कोई न कोई वजह तो अवश्य होगी. आप में से बहुत लोग इस बात से अनजान होंगे. इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मौत के बाद लोगों को लाश जलाने की जल्दी क्यों रहती है और अंतिम संस्कार के असल मायने क्या हैं.

गरुड़ पुराण में लिखा है कि जब तक गांव या मोहल्ले में किसी की लाश पड़ी होती है तब तक घरों में पूजा नहीं होती. इतना ही नहीं, गरुड़ पुराण के अनुसार लोग अपने घरों में चूल्हा भी नहीं जला सकते. मतलब इस स्थिति में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता. और तो और शव रहने तक व्यक्ति स्नान भी नहीं कर सकता. जब तक मृतक का शरीर रहता है लोगों के ज़रूरी काम रुके रहते हैं. इसलिए लोग जल्दी से जल्दी अंतिम संस्कार करने की फिराक में रहते हैं. जब तक अंतिम संस्कार नहीं होता लोग मृतक शरीर की देखभाल करते हैं क्योंकि यदि कोई जानवर शरीर को छू ले तो उसकी दुर्गति होती है.

अंतिम संस्कार करने का फायदा मरने वाले और घरवालों, दोनों को होता है. दुष्ट या पापी व्यक्ति का ढंग से अंतिम संस्कार कर देने पर उसकी दुर्गति नहीं होती. मरने के बाद उसकी आत्मा चैन से रहती है. जलाने से पूर्व घर और रास्ते में पिंड दान करने से देवता-पिशाच खुश हो जाते हैं और लाश अग्नि में समा जाने के लिए पूरे तरीके से तैयार हो जाती है. जलाते वक़्त लाश के हाथ-पैर बांध दिए जाते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शरीर पर पिशाच कब्ज़ा न कर पाये. लाश को जलाते वक़्त हमेशा चंदन और तुलसी की लकड़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए. यह लकड़ियाँ शुभ होती हैं और जीवात्मा को दुर्गति से बचाती हैं.

अंतिम संस्कार में सारे कार्य गरुड़ पुराण के अनुसार ही करना चाहिए. इसमें इस बात का उल्लेख मिलता है कि शरीर को जलाते समय उसका सिर किस दिशा में होना चाहिए, कब रोना है और कब अस्थि संचय करना है आदि. इसलिए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए किसी योग्य पंडित को ही रखना चाहिए. लोग अंतिम संस्कार में सही नियमों का पालन नहीं करते जिस वजह से घर में समस्याएं देखने को मिलती हैं. वैसे तो छोटे बेटे को ही चिता को अग्नि देनी चाहिए. उसके बाद भाई, भतीजा, नाती अग्नि देने के पात्र हैं. इनमें से यदि कोई नहीं है तो पत्नी या बेटी भी चिता को अग्नि दे सकती है.

DMCA.com Protection Status