विशेष

अध्यापक दिवस पर खास अध्यापिकाओ के लिये कविता

Teachers Day Special Poem

सुर्ज के साथ उठके देती अपना परिचय
वो ना सुलझा सके ना ऎसा कोई तथ्य
जिंदगी की भागदॊड के साथ घर का काम
दिन मार्गदर्शन करती ना करती वो आराम

न जाने भगवान ने बनाया उन्हे किस माट्टी का
युग मे मां सरस्वती का दुसरा नाम अध्यापिका
घर,समाज,स्कुल सब उनका कार्य क्षेत्र
सेना के फॊजी ओर उनमें ना कोई अंतर

लडती हर रोज बुराइंयो से वो डटकर
जन- जन को एक नया पाठ पढाती
जाने कोनसा रखती अपने पास मंत्र
जो राह दिखाता चले मानव मानव निति का

न जाने भगवान ने बनाया उन्हें किस माट्टी का
युग मे मां सरस्वती का दुसरा नाम अध्यापिका

जिस चमक मे आती शाम उसी चमक मे जाती हॆ
अपने सारे शिष्यो मे श्री राम जॆसा चरित्र बनाति हॆ
दुनिया का हर नया दिन उनके लिये चुनॊती हॆ
भरी कक्षा मे शब्दो को श्याम पट्ट पर नचाती हॆ

जॆसे समद्र कॆद कर रखा हो अमृतवाणि का
न जाने भगवान ने बनाया उन्हें किस माट्टी का
युग मे मां सरस्वती का दुसरा नाम अध्यापिका

बॆठा के सबको कक्षा मे खुद खडी हो जाती हॆ
हर बच्चे को अपने बेटे की तरह पढाती हॆ
पाठ की तरह प्रेम भाव वो सिखाती  हॆ
मन मे छुपी बुराईंयो को आपस मे लडाती हॆ

उनकी वर्णमाला हमें स्वर्ण भविष्य कि ओर ले जाती हॆ
हीरा हॆ अध्यापिका महिला जाति का

न जाने भगवान ने बनाया उन्हें किस माट्टी का
युग मे मां सरस्वती का दुसरा नाम अध्यापिका

जगत जननी सबसे मेहनती हॆ महिला
अध्यापिका का उनमें नम्बर पहला
गुरू मार्गदर्शक हॆ इस समाज की
अध्यापिका गण असली हकदार हॆ सम्मान की

न जाने भगवान ने बनाया उन्हें किस माट्टी का
युग मे मां सरस्वती का दुसरा नाम अध्यापिका

BY:,सोमबीर दुल्हेडी जिला भिवानी

 

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