भारत वियतनाम, अमेरिका और जापन के चोकडी मैं मैं फंस गया है चिन

चीन के विश्व के बाकि राष्ट्रों के साथ आपसी रिश्ते खराब होते जा रहे है।चीन ने अपने किसी भी पड़ोसी से अच्छा रिश्ता नही बना पा रहा। चीन के विस्तारवादी रवैय्ये के कारण सारे देश एक एक कर के उसके खिलाफ हो रहे हैं। चीन की इस विस्तारवाद की रणनीति सभी देशों को समझ मैं आ चुकी है ।

भारत वर्ष ने भी खुद को चीन से सुरक्षित रकह्ने के लिए ब्रह्मोस ,सुखोई जैसे विमानो को सीमा पर तैनात किया हुआ है। चीन की ऐसी स्थिति हो गयी है की उस पर कोई देश विश्वास नही कर पा रहा है। फ़िलहाल पाकिस्तान के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है जिस के चीन के साथ अच्छे सम्बंध हों.

नरेंद्र मोदी फ़िल्हाल चिन के दौरे पर पहुंचने वाले हैं पर चीन पहुँचने से पहले मोदी ने वियतनाम का सफर तय किया। मोदी वियतनाम की राजधानी पहुँचे और वहां पीएम नगुएन जुआन फुक के साथ बातचीत की। मोदी जी का वियतनाम मैं भव्य स्वागत किया गया औरउन्हें बौद्ध मंदिर कुआन सू पगोडा का दर्शन कराया गया।

अटल जी ने साल २००१ मैं वुयतनाम का दौरा किया था और १५ साल बाद मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो वियतनाम पहुँचे हैं। वियतनाम कीअमेरिका के साथ साठ के दशक में जंग हो चुकी है और तीन बार चीन के साथ जंग हो चुकी है, इस बात को ध्यान रखतए हुये मोदी जि ने वियतनाम के प्रधानमंत्री से कहा की ” युद्ध ने आपको दुनिया से अलग रखा लेकिन बुद्ध ने हमारे करीब ल् दिया है।”

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