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जानिए शराब पीकर अंग्रेजी बोलना क्यों शुरु कर देते हैं लोग

आपका जिगरी दोस्त जो हिन्दी मीडियम से पढ़ा है और आम तौर पर हिन्दी बोलता है। लेकिन जब आपके साथ बैठकर शराब के दो प्याले चढ़ा लेता है। जब उसको कुछ नशा हो जाता है तो हर बात का जवाब अंग्रेजी में देने लगता है। क्या आपको पता है वो बिना किसी अंग्रेजी बोलने का कोर्स किए फर्राटेदार अंग्रेजी कैसे बोलने लगता है। वो भी व्याकरण की कम गलतियां करके, उसका उच्चारण भी साफ होता है। आप सबके ऐसे मित्र होंगे और आपने उनको देखा भी होगा। इसीलिए हम आज आपको बताने जा रहे हैं, आपके दोस्त का वो राज जिसके बाद वो अंग्रेजी बोलने लगता है।

रिसर्च से सामने आई चौंकाने वाली बात

दरअसल शराब पीने वालों को लेकर विदेश में एक शोध हुआ है। जिसके बाद ये बात सामने आई है। व्यक्ति जिसमें कमजोर होता है। वो शराब पीने के बाद उसमें महारत कैसे हासिल कर लेता है। भारत में  शहरी आदमी हिन्दी से अंग्रेजी में उतर आता है, तो गांव वाला आदमी शहरी भाषा बोलने लगता है। इसे लेकर एक अध्ययन आया है. साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है. ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है. लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है.

दबू से बन जाते हैं दबंग

रिसर्च में सामने आया की जब हम किसी दूसरे शख्स से मिलते हैं और बात करते हैं तो इन सब बातों का असर हमारी भाषाई क्षमता पर पड़ता है. इस बात को अब तक बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ही स्वीकार किया जाता था… लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने इस विचार को टेस्ट किया.

ऐसे हुआ रिसर्च

इस रिसर्च के लिए 50 जर्मन लोगों के एक समूह को चुना गया जिन्होंने हाल ही में डच भाषा सीखी थी. कुछ लोगों को पीने के लिए ड्रिंक दिया गया जिनमें थोड़ा एल्कोहल था. लोगों के वजन के अनुपात में एल्कोहल की मात्रा दी गई थी. कुछ के ड्रिंक्स में एल्कोहल नहीं था. टेस्ट में भाग लेने वाले जर्मन लोगों को नीदरलैंड्स के लोगों से डच में बात करने के लिए कहा गया. डच भाषियों को ये पता नहीं था कि किसने शराब पी रखी है और किसने नहीं. जांच में ये बात सामने आई कि जिन्होंने शराब पी रखी थी वे बेहतर उच्चारण के साथ बात कर रहे थे. शोधकर्ताओं ने ये साफ किया कि उन्हें ये नतीजे शराब की बहुत कम मात्रा में खुराक देने से मिले हैं।

हेजिटेशन दूर कर कॉन्फिडेंस बढ़ती है शराब

रिसर्च में बात सामने आई की जो लोग डच भाषा कम बोल पाते थे वो शराब पीने के बाद अच्छी तरीके से डच बोल रहे थे। भारत के परिपेक्ष में देखें तो शराब के नशे में लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। जिसको आप आत्मविश्वास भी कह सकते हैं। साथ ही आपका का संकोच यानी हेजिटेशन को दूर करती है। जिसके बाद आप खुद को मानसिक रूप से ज्यादा सक्षम और मजबूत पाते हैं।

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