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सालों से जोड़े हुए चिल्लर लेकर बाइक खरीदने शोरूम पहुंचा शख्स, मना करने के बाद आपबीती सुन रो पड़ा डीलर

रुपयों का महत्व उसी को पता होता है जो मेहनत और लगन से पाई-पाई जोड़कर आगे बढ़ा हो. पाई-पाई की कीमत सिर्फ मेहनत करने वाला शख्स ही जान सकता है. ऐसा ही एक वाक्या मध्यप्रदेश में हुआ जब हसीब हिन्दुस्तानी नामक शख्स बाइक खरीदने के लिए 57000 रुपये की चिल्लर लेकर शोरूम पहुंचा.

यह देख कर शोरूम में मौजूद सभी लोग हैरान हो गये और एक-दूसरे का चेहरा निहारने लगे. इतने सारे चिल्लर एक साथ देख कर पहले तो शोरूम डीलर ने हसीब को मना कर दिया लेकिन जब उन्होंने हसीब की आपबीती सुनी तो उसकी आंखों में आंसू आ गए. हसीब ने बताया कि किस तरह उसने एक-एक रुपये जोड़कर बाइक के लिए इतने रुपये जमा किये हैं. उसकी कहानी सुनकर शोरूम डीलर ने चिल्लर लेने के लिए हां कह दिया जिसके बाद हसीब ने अपने परिवार की दिवाली खास बनाने के लिए हीरो हौंडा स्प्लेंडर खरीदा.

3 साल से जोड़ रहे थे पैसे

हसीब ने डीलर को बताया कि बाइक खरीदने के लिए उसके परिवार के 10 लोगों ने 3 साल से एक-एक रुपये जोड़कर इतने रुपये इकट्ठे किये हैं. चिल्लर इतने ज़्यादा थे कि उन्हें गिनना पहले तो नामुमकिन लग रहा था. लेकिन बाद में इतने सारे चिल्लर को गिनने के लिए शोरूम के लगभग पूरे स्टाफ को लगा दिया गया. इस काम को पूरा करने में पूरे तीन घंटे लग गए. हसीब 10 के 322 सिक्के, 5 के 1,458 सिक्के, 2 के 15,645 सिक्के और 1 के 14,600 सिक्के लेकर शोरूम पहुंचा था.

प्रधानमंत्री मोदी से मिली प्रेरणा

हसीब ने बताया कि उनको पैसे जोड़ने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक स्पीच से मिली थी. उस स्पीच में उन्होंने कहा था कि व्यक्ति को डेली खर्च में से छोटी-छोटी बचत करनी चहिये. हसीब के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की उस स्पीच के बाद से ही वह और उनके परिवार के बाकी सदस्य पैसे जोड़ने लगे थे. शोरूम के डीलर कुणाल कांकर ने कहा कि लोगों को खुल्ले पैसों की काफी दिक्कत होती है. इसलिए हसीब से मिले सारे चिल्लर वह बैंक में जमा करवा देंगे ताकि खुल्ले पैसों की कमी कुछ हद तक कम हो सके. हसीब मध्य प्रदेश के राइसिन शहर में एक दुकान चलाते हैं. वह गुरुवार को अपने घर के पास वाले हीरो हौंडा शोरूम में बाइक खरीदने पहुंचे थे.

 

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