नई दिल्ली – पिछले साल 8 नवम्बर को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा काले धन के खिलाफ जो जंग छेड़ी थी उसका असली रिजल्ट तो आज आया है। दरअसल, आज 13 बैंकों ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें 2,09,032 संदिग्ध कंपनियों में से कुछ के बैंक खातों के ऑपरेशन तथा नोटबंदी के बाद के जमा-निकासी संदिग्ध है। 

मोदी सरकार के निशाने पर 5,800 शेल कंपनियां

सरकार ने कालेधन पर कार्रवार्इ तेज करने का संकेत देते हुए कहा है कि उसके पास करीब 5,800 ऐसी शेल कंपनियों की जानकारी हैं, जिनके खाते में जमाराशि नोटबंदी से पहले शून्य थी, लेकिन नोटबंदी के बाद उनके खातों में करीब 4,574 करोड़ रुपये जमा हो गए। और इसमें से 4,552 करोड़ रुपये निकाल भी लिए गए। यानि करीब 5000 करोड़ के कालेधन को सफेद किया गया।

हज़ारों कंपनियों का पंजीकरण हुआ रद्द

शुक्रवार को सरकार ने कहा कि इसी साल अभी तक 20,903 संदिग्ध कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है। 13 बैंकों ने इनमें से कुछ कंपनियों के बैंक खातों की नोटबंदी के बाद की जानकारी दी है। गौरतलब है कि पिछले महीने सरकार ने दो लाख से अधिक कंपनियों के बैंक खातों को सीज़ कर दिया था। मोदी सरकार को कालेधन तथा मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवार्इ करने में आज एक बड़ी सफलता हाथ लगी है।

 

अर्थव्यवस्था पर पीएम मोदी को मिला विश्व बैंक का साथ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार को आज भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर थोड़ी सुस्ती के बाद लगातार हमलावर हो रहे विपक्ष के खिलाफ विश्व बैंक का साथ मिला है। विश्व बैंक ने भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाएगी और एक बार फिर से रफ्तार पकड़ लेगी। यह बातें विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम कही। उनका मानना है कि जीएसटी की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था में सुस्ती अस्थाई है।

 

अब दिखेगा नोटबंदी का असर

गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद ज्यादातर लोगों और कंपनियों ने अपने कालेधन को सफेद करने के लिए कई अवैध तरीके अपनाएं थे। जिसकी वजह से बैंक के आकड़ों के मुताबिक नोटबंदी में कालाधन उतनी मात्रा में सामने नहीं आ सका जितनी सरकार ने उम्मीद की थी। लेकिन शेल कंपनियों के जरिए अपना कालाधन सफेद करने वालों के लिए यह आकड़े सामने आने के बाद मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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