घर के और खुद के अभाग्य से मुक्ति पानें के लिए अष्टमी और नवमी की रात 12 बजे के बाद करें ये उपाय

आज अष्टमी है। नवरात्री के 9 दिन हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण 9 दिनों में से एक हैं। अगर बात शारदीय नवरात्र की हो तो इक महत्व और भी बढ़ जाता है। शारदीय नवरात्री में माता के 9 रूपों की पूजा की जाती है। जगह-जगह माता के दरबार में और पंडालो में माता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जमा हो रही है। नवरात्री के समय में ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त माता से कोई चीज मांगता है, वह जरुर प्राप्त हो जाता है।

अष्टमी और नवमी होती है बहुत ही ख़ास:

नवरात्री का पर्व जीवन के 9 अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करके जीवन के नवरंग का निर्माण करती है। किसी भी जीव का अपनी माता के कोख से जन्म लेने के बाद पंचमहाभूतों के यथार्थ में सामने तक का सफ़र करना ही जीवन के नवरंग कहलाते हैं। वैसे तो नवरात्री के सभी 9 दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अष्टमी और नवमी की अपनी एक अलग ही विशेषता और महत्व होती है।

हो जाती है जीवन की हर मनोकामना पूर्ण:

अष्टमी पर देवी महागौरी और नवमी के दिन देवी सिद्धिदात्री का विशेष रूप से पूजन किया जाता है। अष्टमी और नवमी के दिन पुरे देश में दुर्गा पूजा की धूम मची रहती है। देश के हर कोनें में माता के दरबार सजे हुए दिखाई देंगे। ऐसा माना जाता है कि इन दो दिनों में माता की पूजा करनें से जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति होती है। इन दो दिनों में कुछ ख़ास उपाय को करनें से आपकी हर समस्या खुद-ब-खुद हल हो जाती है।

इन दो दिनों में करें ये उपाय:

*- अष्टमी और नवमी की रात 12 बजे के बाद अपने घर के मुख्य द्वार पर मौली की बत्ती बनाकर शुद्ध देशी घी का दीपक जलाएं। ऐसा माना जाया है कि यह करनें से आपके जीवन के अभाग्य दूर हो जाते हैं और आपके भाग्य के द्वार खुल जाते हैं।

*- जीवन में नवदुर्गा की कृपा पानें के लिए श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अगर संभव हो तो किसी जानकार विद्वान पंडित से करवायें।

*- 9 साल से छोटी उम्र की 9 कन्याओं को अपने घर बुलाकर खीर खिलाएँ और उन्हें कुछ उपहार स्वरुप दें। इससे माँ लक्ष्मी बहुत ज्यादा प्रसन्न होती हैं।

*- माता के किसी भी शक्तिपीठ या मंदिर में जाकर फलों का भोग लगायें और तत्पश्चात उसे गरीबों में बाँट दें। जीवन के सभी कष्टों से आपको मुक्ति मिलती है।

*- अपने सुहाग की लम्बी उम्र के लिए आप नवरात्री के समय में देवी मंदिर जाकर श्रृंगार का सामान माता को अर्पित करें।

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