बॉलीवुड

गुफाओं में जिंदगी काट रहा है ये धांसू एक्टर, एक सीन ने दिलाई थी बड़ी पहचान

बॉलीवुड फिल्मों में काम करने वाले एक्टरों के बारे में आम धारणा होती है कि वो लक्जरी लाइफ जीने के आदी होंगे। पार्टियों में रोज शाम गुजरती होगी। मुंबई जैसे शहर में आलीशान बंगला होगा। लेकिन कुछ विरले हैं जो इस मामले में बिल्कुल अलग है। उनका जीने का तरीका अलग है। अल्हड़ और मस्तमौला, अपनी शर्तों पर जीवन जीने के आदी है। उन्ही में से एक हैं फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ में जादू की झप्पी वाला सीन करके सुर्खियों में आए सफाई कर्मचारी बने सुरेंद्र राजन, जिनको संजय दत्त जादू की झप्पी देते हैं। इस किरदार को निभाने वाले सुरेंद्र राजन के बारे में कम ही लोग जानते हैं, की सुरेंद्र बीते चार साल से घर बार छोड़कर हिमालय की तलहटी में रह रहे हैं।

पत्थरों की गुफा में रहकर झरने का पानी पी रहे हैं

शहर छोड़कर हिमालय की प्राकृतिक वादियों में बसे सुरेंद्र राजन 75 साल के हैं, और पिछले चार साल से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित हिमालय के सबसे आखिरी गांव खुन्नू में रह रहे हैं। सुरेंद्र हिमालय में पत्थरों से बने एक कमरे के घर में रहते हैं जिसे उन्होंने एक रिटायर्ड फौजी से मांगा है। फौजी उस घर में चाय की दुकान चलाता था। गांव में जाने के लिए तकरीबन 17 किलोमीटर पहाड़ चढ़ना पड़ता है, इसलिए वे तीन-चार महीनों में शहर आकर साबुन, तेल जैसे सामान खरीदने आते हैं। झरनों से पानी की व्यवस्था हो जाती है, पास में एक नदी भी बहती है।

16 साल तक कार ही बना रहा आशियाना

करीब 70 से अधिक फिल्मों में छोटे-बड़े रोल करने वाले सुरेंद्र एक चित्रकार और फोटोग्राफर के रूप में एक बड़ी पहचान रखते हैं और इन सबके अलावा इनका घुमक्कड़ स्वभाव और बेफिक्री से जीने का अंदाज आपको हैरान कर देगा। सुरेंद्र बताते हैं कि जीवन की सच्चाई काफी पहले पता चल गई थी और इसलिए मैंने अपना जीवन घूमते हुए बिताया। देश के हर कोने के साथ हंगरी, ऑस्ट्रिया जैसे कई देशों में महीनों तक यात्राएं की है। घूमने के शौक की वजह से 16 साल तक किराए का मकान भी नहीं लिया। कार में ही देश भर की सैर करता रहता था।

वह इकट्ठा कर रहा जो साथ ले जा सकूं

सुरेंद्र बताते हैं, “लोगों को मेरा जीवन अजीब लग सकता है लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ पैसे के पीछे भागना अजीब है। मैंने कभी करियर जैसी चीज पर यकीन नहीं किया। मैंने काफी पहले सोच लिया था कि सिर्फ वही चीजें इकट्ठा करूंगा जो अपने साथ ऊपर ले जा सकूं। एडवेंचर के शौक की वजह से मुझे सर्वाइव करने का तरीका पता है। वहां प्रकृति की गोद में मुझे मेरी जरूरत का सारा सामान मिल जाता है।”

 

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