मैं मुस्लिम हूँ, मैं मोदी जी से नफरत करता था लेकिन इस अनुभव के बाद मैं उनका सबसे बड़ा समर्थक हूँ

आनंद विहार मेट्रो स्टेशन से एक मेरे बेटे के उम्र का युवक चढ़ा जिसकी उम्र तक़रीबन 40 साल होगी, मेरे बगल में बैठा एक सज्जन युवक उठकर के अपनी जगह उसको दे दी, वो धन्यवाद कहते हुए बैठ गया, हंसमुख था. (A Muslim who used to hate Modi is now a big fan)

बातचीत की शुरुआत उस युवक ने की जिसने अपनी सीट छोड़ी थी, क्या पढ़ रहे हैं अंकल जी?

उस मीठे आवाज़ में भोजपुरी की झलक और अंकल के साथ जी, पूर्वांचल के हो? मैंने मुस्कुरा के पुछा वो बोला जी बागी-बलिया घर है, चित परिचित अंदाज़ में, एक ख़ास लगाव रहा है मेरा इस जिले से, युवा तुर्क चद्रशेखर यहीं से तो थे.

मैंने कहा क्या करते हो? बोला इंजीनियर हूँ, गेल में, ऑफिस जा रहा हूँ, मैंने कहा की अखबार पढ़ रहा हूँ तो बोला की मोदी-मोदी छाए रहते हैं हर जगह आजकल अखबार में और हंसने लगा, मुझे भी हंसी आ गयी, मैंने कहा तुम समर्थन नहीं करते नरेंद्र मोदी जी का?

उसने कहा अंकल मैं अंधभक्त नहीं हूँ और यमुना बैंक पर नॉएडा जाने के लिए मेट्रो बदल लिया। मैं परिचित हूँ इस शब्द से,

मेरी बगल में बैठा मेरे बेटे की उम्र का वो युवक ने तपाक से पुछा आप पसंद करते हैं?

मैंने कहा, अंध भक्त मैं भी नहीं हूँ, नरेंद्र मोदी मुझे भी नहीं पसंद गुजरात दंगों में मैंने कुछ अपनों को खोया है और जैसा की सब कहते हैं नरेंद्र मोदी के हाथ रंगे हैं उनके खून से, जाने अब प्रधानमंत्री होकर के देश का क्या हश्र करेंगे।

वो बोला मैं आपको एक मेरे साथ घटित घटना बताता हूँ

मेरे पिता जी दिल्ली सी पी डब्लु डी में अधीक्षक अभियंता थे, पांच महीने पहले 94 वर्ष की अवस्था में वो अल्लाह को प्यारे हो गए,वो 1975 में त्याग पत्र दे दिए थे और तबसे पेंशन के तौर पर 1975 से 2014 तक करीब 40,000 प्रति माह मिलता था।

2010 से पेंशन मंत्रालय से लगातार संपर्क में थे और वो कोशिश कर रहे थे की मेरी माँ जिनकी उम्र 89 साल है उनका नाम सेव निवृत के तौर पर शामिल कर लिया जाये।

2012 में मेरे पिता जी को शार्ट विसुअल परसेप्शन हो जाने की वजह से मैं उनको याद दिलाया था ईमेल से और फ़ोन करके भी, मुझे बताया गया की वो मेरी प्रार्थना स्वीकृत किये हैं और मुझे इस मामले में जल्द सूचित किया जायेगा और कागज़ को जांच कर भेज दिया जायेगा।

अब 2014 था और मेरे पिताजी को अभी तक कोई सूचना नहीं थी की मेरी माँ का नाम पेंशन के लिए शामिल कर लिया गया है या नहीं, वो चल बसे इस दुःख के साथ की उनकी पत्नी को 25000 प्रति माह नहीं मिलेगा।

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जब मैं पिताजी की मौत के बाद सारे जरूरी कागजात के साथ गया तो उन लोगों ने कहा की आपके माता जी का नाम पेंशन के लिस्ट में नहीं है, मैंने 2010 में भेजी गयी प्रार्थना की कॉपी भेजी थी, 4 दिन के भीतर मेरे पास एक ईमेल आया किसी का विभाग से की 1 सप्ताह के भीतर सारे कागजात तैयार हो जायेंगे।

पांचवे दिन मुझे एक फ़ोन आया जिन्होंने खुद को डॉ जीतेन्द्र सिंह बताया और कहा की आपके माताजी के कागजात को बैंक में भेज दिया गया है, और अब किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी, मैंने धन्यवाद कहा और फ़ोन रख दिया।

जब मैंने उनकी वेबसाइट की चेक किया तो पता चला की डॉ जीतेन्द्र सिंह मिनिस्ट्री फॉर पेंशन्स एंड पर्सनेल ग्रीवांस (minister of state for pensions and personnel grievances) मिनिस्टर हैं जो सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करते हैं.

जब मैंने उनको धन्यवाद कहने के लिए दुबारा फ़ोन किया तो उन्होंने कहा की मोदी जी का आदेश है की कोई भी औरत जो अपने पति को खोयी है, उन लोगों को पेंशन के कामकाज के लिए और परेशानी नहीं होनी चाहिए, और ऐसे मामलों मैं खुद अपने स्तर पर कार्यवाही करूँ ?

जो मनमोहन सिंह चार साल में नहीं कर पाये थे मोदी जी ने चार दिन में कर दिया।

और अगले महीने जब मेरी माँ को जीवित प्रमाण पत्र देना था तो बैंक के अधिकारी हमारे घर आये उनका हस्ताक्षर लेने के लिए क्योंकि मेरी माँ बुज़ुर्ग हैं। और वित्त मंत्रालय से ये सख्त निर्देश हैं बैंकों को की बुज़ुर्गों के साथ ज्यादे विनम्रता से पेश आएं और उन्हें ज्यादे तरजीह दें।

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