अध्यात्म

अद्भुत फूल 14 साल में एक बार खिलता है हिमालय की गोद में, देखने वाले की होती है हर मनोकामना पूर्ण

हिमालय के बारे में कहा जाता है कि वहाँ कई अद्भुत चीजें देखने को मिलती हैं। हिमालय दैवीय स्थान है, इसलिए वहाँ पायी जानें वाली चीजें भी दैवीय ही होती हैं। इन्ही में से एक है ब्रह्म कमल, जिसे देवताओं का पुष्प कहा जाता है। यह देखने में बहुत ही खुबसूरत और अद्भुत होता है। इस फूल के बारे में कहा जाता है कि आधी रात में खिलता है ताकि इसे कोई देख ना पाए। वनस्पति शास्त्र में इस फूल की 31 प्रजातियों का वर्णन मिलता है।

ब्रह्मा जी का फूल है ब्रह्म कमल:

प्रकृति की निर्मित हर एक चीज ही बहुत ख़ास और अद्भुत होती है। कुछ का सम्बन्ध दैवीय शक्तियों से भी होता है। पीपल को दैवीय वृक्ष कहा जाता है, क्योंकि इसपर हिन्दू धर्म के सभी देवताओं का निवास होता है। नदियों ने गंगा नदी को दैवीय नदी का दर्जा दिया गया है। वैसे ही फूलों में भी दैवीय शक्तियाँ होती हैं। इस फूल के बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा। इस फूल में अलौकिक शक्तियाँ हैं। ब्रह्म कमल, जैसा की नाम से ही पता चल रहा है कि यह श्रृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का फूल है।

फूल की खूबसूरती कर लेगी किसी को भी आकर्षित:

हिमालय की गोद में पाया जाने वाला यह फूल पौराणिक महत्व भी रखता है। इस फूल का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह फूल मनुष्य की इच्छाओं की भी पूर्ति करता है। इस फूल का रंग सफ़ेद होता है, और इसकी खूबसूरती किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है। इसके बारे में यह भी कहा जाता है कि जिस कमल के फूल पर जगत के रचयिता ब्रह्मा से विराजमान रहते हैं, वही ब्रह्म कमल है। इसी फूल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई है।

फूल को देखने वाले की हो जाती है हर इच्छा पूरी:

एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव जंगल में वनवास पर गए थे, उनके साथ उस समय द्रौपती भी गयी थी। द्रौपती कौरवों द्वारा किये गए अपमान को भूली नहीं थी, साथ में जंगल की भी परेशानी थी। अचानक से उन्होंने पानी में बहते हुए एक सुनहरे कमल को देखा और उनका सारा दुःख-दर्द ख़त्म हो गया। उसी समय उन्हें अध्यात्मिक उर्जा का अनुभव हुआ। द्रौपती ने सबसे प्यारे पति दुर्योधन को फूल लाने के लिए भेजा। इसी खोज के दौरान भीम से हनुमान जी मिले थे। इस फूल के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसे देखने वाले की हर इच्छा पूरी हो जाती है।

इस फूल को देख पाना है लगभग नामुमकिन:

हालांकि इसे खिले हुए देख पाना काफी मुश्किल है। यह फूल आधी रात को खिलता है और केवल कुछ देर के लिए रहता है। साथ ही यह फूल 14 सालों में एक बार के लिए ही खिलता है, इस वजह से इसे देख पाना लगभग नामुमकिन ही है। इस फूल से निकलने वाले पानी को पी लेने से सारी थकान मिट जाती है। इस फूल के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह देवी नंदा का प्रिय फूल है। इसलिए इस फूल को नन्दाष्टमी के समय ही तोडा जाता है। इस फूल को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है।

उत्तरखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस। उत्तराखंड और हिमालय पर पाया जाने वाले ब्रह्म कमल को हिमाचल प्रदेश में ‘दूधाफूल’, कश्मीर में ‘गलगल’, श्रीलंका में ‘कदुफूल’ और जापान में ‘गेक्का विजन’ कहते हैं। यह फूल कमल की तरह पानी में नहीं बल्कि जमीन पर ही खिलता है। इस फूल का सृजन ब्रह्मा जी ने किया था। कहानी के अनुसार गणेश जी का सर इसी की सहायता से जोड़ा गया था। माता पार्वती के अनुरोध करने पर ब्रह्मा जी ने ब्रह्म कमल का सृजन किया।

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