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रेड लाइट एरिया में पैदा हुई, पिता ने किया दुष्कर्म तो माँ ने किया घर से बाहर,अब लाइफ है कुछ ऐसी

नई दिल्ली – आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं जिसका जन्म तो रेड लाइट एरिया में हुआ लेकिन आज वो लाखों करोड़ों के लिए प्रेरणा बन गई है। हम बात कर रहे हैं देश के दूसरे सबसे बड़े रेड लाइट एरिया मुंबई के कमाठीपुरा में पैदा हुआ और 23 साल की उम्र तक वहीं रहने वाली शीतल जैन की।

‘एक सेक्स वर्कर की बेटी बड़ी होकर सेक्स वर्कर ही बनेगी’

जब वह बच्ची थी, तब से शीतला जैन को सिखाया गया था कि एक सेक्स वर्कर की बेटी केवल देह व्यापार में ही रह सकती है। कमाठीपुरा के रेड-लाइट एरिये में अपनी ज़्यादा ज़िंदगी जीते हुए शायद शीतल या कोई और कभी ये सोच नहीं सकता कि वह एक दिन वाशिंगटन जायेगी और देश में अपना एक अलग मुकाम हासिल करेगी।

शीतल अपने बारे में बताते हुए कहती हैं, “मैं 10 वीं में पढ़ाई कर रही हूं और मुझे ड्रम बजाना और डांस करना पसंद है। एक सामान्य लड़की की तरह मेरे भी सपने हैं। लेकिन मैं कामठीपुरा में बड़ी हुई और मैं एक सेक्स वर्कर की बेटी हूं और मैं कभी अपने पिता से नहीं मिली। मैं अभी भी 10 वीं में हूं क्योंकि मैं केवल तीन साल तक ही स्कूल गई हूं। मुझे बहुत अधिक हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन मेरे पास बड़े सपने हैं! शीतल कहती हैं, “मैं अमेरिका में म्यूजिक स्कूल जाना चाहती हूं और ड्रमिंग डिप्लोमा की डिग्री लेना चाहती हूं ताकि मैं मुम्बई के रेड लाइट इलाकों में म्यूजिक क्लास शुरू कर सकूं।”

शीतल को क्रांति गैर-सरकारी संगठन द्वारा सहायता दी जा रही है, जो कि व्यावसायिक यौनकर्मियों के बच्चों के लिए काम करता है। गैर सरकारी संगठन की मदद से शीतल ने अमेरिका के ड्रम स्कूल, वाशिंगटन में एक वर्षीय डिप्लोमा के लिए आवेदन किया था और वो सेलेक्ट हो गई। शीतल को हाल ही में उदयपुर में स्वराज विश्वविद्यालय में दाखिला मिला था, लेकिन जब एनजीओ ने उनसे पूछा कि वह क्या करना चाहती हैं,

तो उन्होंने कहा, “मेरा दिमाग कहता हैं कि मैं स्वराज जाऊं, लेकिन मेरा दिल कहता है कि मैं ड्रमिंग करूं।” शायद ही मेरी जैसी लड़कियों को कभी अपने सपने पूरा करने का मौका मिलता है। एनजीओ ने ऐसा करने में उनकी मदद करने का फैसला किया। सबसे पहले, उन्होंने भारत में संगीत विद्यालयों की तलाश की। 10 वीं तक पढ़ी होने के कारण शीतल को अमेरिकी विद्यालय में दाखिला मिलना थोड़ा मुश्किल था। मौका मिला और एक वर्ष के कोर्स कि इसकी लागत 8,000 अमेरिकी डॉलर है।

आज शीतल समाज के लिए मिसाल कायम कर रही है। शीतल ड्रम बजाने में महारत हासिल चाहती है। आपको बता दें कि शीतल के सौतेले पिता ने कई बार उसका यौन शोषण किया। शीतल ने बताया कि एक रात जब वह सो रही थी तब उसके सौतेले पिता का हाथ उसके प्राइवेट पार्ट पर था। हालांकि, शीतल किसी तरह उस दलदल से बाहर आ चुकी हैं और अब अपने सपनों को जी रही हैं। शीतल को अपने इस जुनून को सच करने के लिए साल भर का कोर्स करने के लिए स्कॉलरशिप मिल गई और अब वो अमेरिका जाकर ड्रम बजाने की ट्रेनिंग लेकर वापस आ चुकी हैं। आपको बता दें कि शीतल ने ब्रिटेन में कई शो भी किया है।

अमेरिका से वापस लौटने के बाद शीतल रेड लाइट एरिया के बच्चों के लिए कुछ करना चाहती है। इसलिए अब वो किसी कंपनी से नहीं बल्कि इसीलिए वो रेड लाइट एरिया के बच्चों के लिए स्कुल खोलकर पढ़ाना चाहती हैं। शीतल बंगलुरु की एक एनजीओ ‘मेक ए डिफरेंस’ में काम रही हैं। शीतल जल्द ही अपने जैसे बच्चों को एक नई जिंदगी देने के लिए रेड लाइट एरिया में ही एक म्यूजिक क्लास शुरु करने वाली हैं।

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