अध्यात्म

सावन महीने में भोलेनाथ को चढ़ा दें ये 1 फूल, खत्म हो जाएंगे जीवन के हर दुख

सावन का पावन महीना 14 जुलाई से शुरू हो चुका है। यह 12 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान हर शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने में लगा हुआ है। कहते हैं सावन में यदि शिवजी आप से खुश हो गए तो हर मनचाही मुराद पूरी कर देते हैं। ऐसे में आज हम आपको उन फूलों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय हैं। इन्हें सावन के महीने में चढ़ाने से शिवजी भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

गुलाब के फूल

शिवजी को गुलाब का फूल काफी प्रिय होता है। इसे भोलेनाथ को अर्पित करने से घर में धन की वर्षा होती है। इतना ही नहीं इससे घर के सभी सदस्य हेल्थी रहते हैं। घर में कोई बीमारी डेरा नहीं जमाती है। शिवजी की कृपा बरसती है।

अलसी के फूल

शिवजी को अलसी के फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन अलसी के फूलों को शिवलिंग पर चढ़ाकर माफी मांगने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

बेले के फूल

यदि आपकी शादी नहीं हो रही है या विवाह में कई बाधाएं आ रही है तो बेले का फूल शिवजी को अर्पित करें। इससे आपके विवाह के योग बन जाएंगे। साथ ही आपको आपकी पसंद का जीवनसाथी भी मिल जाएगा।

चमेली के फूल

शिवजी को चमेली का फूल चढ़ाने से सारे अटके हुए काम समय पर पूर्ण हो जाते हैं। यदि आपका कोई काम ठीक से हो नहीं रहा या आप किसी नए काम की शुरुआत करने जा रहे हैं तो पहले शिवजी को चमेली का फूल अर्पित कर उनसे आशीर्वाद ले लीजिए। आपका काम हो जाएगा।

धतूरे का फूल

शिवपुराण की माने तो भोलेनाथ की पूजा धतूरे के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। इसलिए आप उनकी पूजा में धतूरे के फल और फूल दोनों चढ़ा दें। इससे आपको सभी दुखों से छुटकारा मिलेगा। साथ ही आपके घर नन्हा मेहमान, सुख और समृद्धि आएगी।

हारसिंगार के फूल

हारसिंगार का फूल भी शिवजी को प्यार होता है। ऐसा कहा जाता है कि सावन के महीने में शिवलिंग पर हारसिंगार का फूल अर्पित करें तो बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। चीजें हमेशा आपके पक्ष में होती है।

मदार का फूल

मदार को कुछ लोग आक या आंकड़े के फूल भी कहते हैं। कहा जाता है कि शिवजी को मदार के फूल चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगले जन्म में आपको और भी अधिक सुख मिलते हैं।

ये फूल न चढ़ाएं

शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। दरअसल एक बार शिवजी और ब्रह्माजी में किसी बात को लेकर बहस हो गई थी। इस दौरान ब्रह्माजी के झूठ में केतकी के फूल ने भी साथ दिया था। तभी से शिवजी ने क्रोधित होकर इस फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था।

 

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