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‘अग्निपथ’ की आग में रेलवे के 1000 करोड़ खाक, जानिए कितनी होती है 24 बोगी वाली एक ट्रेन की लागत

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना की विरोध की आग में केंद्र सरकार का जो प्रतिष्ठान सबसे ज्यादा जला वो है रेलवे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि विरोध के दौरान हुई हिंसा और आगजनी में रेलवे को करबी 1000 करोड़ का नुकसान है। रेलवे को ना केवल अपनी संपत्ति का नुकसान उठाना पड़ा बल्कि ट्रेनों के रद्द होने यात्रियों को करोड़ों रुपए रिफंड भी करने पड़े।

रिफंड में लौटाने पड़े करोड़ों रु

बताया जा रहा है कि हिंसा की वजह से रेलवे को 922 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करना पड़ा जबकि 120 ट्रेन आंशिक रूप से रद्द कर दी गईं। इन ट्रेनों के रद्द होने से करीब 12 लाख ट्रेन यात्रियों को सफर प्रभावित हुए। बताया जा रहा है कि रेलवे को ट्रेनों के रद्द होने से करभी 70 करोड़ रुपए रिफंड के रूप में लौटाने पड़े हैं।

ट्रेनों को जलाने से भारी नुकसान

बताया जा रहा है कि अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान बिहार समेत अलग-अलग राज्यों में 21 ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया गया। ट्रेनों को जलाने से रेलवे को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक एक रेल इंजन को बनाने में 20 करोड़ की लागत आती है, जबकि एक एसी कोच को बनाने में 3.5 करोड़ रुपए का खर्च आता है।  स्लीपर कोच को बनाने 1.25 करोड़ और जनरल कोच को बनाने में 80 लाख की लागत आती है।

इस हिसाब से अगर जोड़ें तो 24 बोगी वाली ट्रेन की लागत लगभग 70 करोड़ रुपए आती है। आप अंदाजा लगा सकते हैं इन प्रदर्शनों को दौरान रेलवे को हुए नुकसान का आंकड़ा करीब 1 हजार करोड़ के आसपास बैठता है।

पिछले एक दशक में सबसे बड़ा नुकसान

बताया जा रहा पिछले एक दशक में प्रदर्शन और विरोध के दौरान रेलवे को इतना नुकसान नहीं पहुंचा जितना अग्निपथ योजन के विरोध के दौरान पहुंचा है। 2020-21 में प्रदर्शनों के दौरान रेलवे को करीब 467 करोड़ का नुकसान हुआ था, इसमें किसान आंदोलन का एक बड़ा योगदान था। 2019-20 में करीब 100 करोड़ का नुकसान हुआ था।

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