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पिता चलाते है टेंपो, मां करती है मजदूरी, काफी संघर्षों के बाद अब बेटी बनेगी गांव की पहली डॉक्टर

दुनिया में हर इंसान सफलता का स्वाद चखना चाहता है परंतु सिर्फ सफलता सोचने से नहीं मिलती है। इसके लिए जीवन में बहुत मेहनत और कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपने जीवन में कामयाबी पाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं, परंतु सभी लोगों को कामयाबी नहीं मिलती है।

ऐसा कहा जाता है कि अगर अपनी मंजिल तक पहुंचना है, तो इसके लिए मेहनत के साथ-साथ हौसले भी बुलंद होने चाहिए। जो लोग मार्ग में आने वाली मुसीबतों का सामना करते हुए निरंतर कोशिश करते रहते हैं उन्हें एक ना एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है।

भले ही आपकी राहों में मुसीबतें कितने भी आएं परंतु इंसान को कभी भी हार नहीं मानना चाहिए। जब तक इंसान अपनी मंजिल तक ना पहुंच जाए, तब तक उसे निरंतर कोशिश करते रहना चाहिए। इंसान की मेहनत कभी भी खराब नहीं जाती है।

इसी बीच आज हम आपको राजस्थान के झालावाड़ की रहने वाली टेंपो चालक की बेटी नाजिया की कहानी बताने जा रहे हैं, जो अपने गांव की पहली ऐसी बेटी है, जो डॉक्टर बनने जा रही है। लेकिन यह मुकाम हासिल करने के लिए नाजिया को अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा है।

टेंपो चालक हैं पिता, खेतों में मजदूरी करती हैं मां

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं इस दुनिया में कई लोग हैं, जो अपनी किस्मत के सहारे बैठे रहते हैं। वह यही सोचते हैं कि उन्हें अपनी किस्मत से कामयाबी मिल जाएगी। वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी लोग रहते हैं, जो अपनी सफलता खुद लिखते हैं। नाजिया झालावाड़ जिले के पचपहाड़ गांव की रहने वाली है। इसका बचपन काफी गरीबी में बीता है। नाजिया के पिताजी का नाम इसामुद्दीन है, जो एक टेंपो चालक हैं।

वहीं नाजिया की माता जी आमिना बी खेतों में मजदूरी करती हैं। घर का गुजारा जैसे तैसे चलता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। नाजिया ने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं। भले ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने अपनी बेटी नाजिया की पढ़ाई लिखाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। मेहनत मजदूरी करके उन्होंने अपनी बिटिया को पढ़ाया।

नाजिया थीं एक होनहार छात्रा

नाजिया पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार थीं, वह एक होनहार छात्रा थीं। माता-पिता ने हमेशा से ही अपनी बेटी का पूरा साथ दिया और प्रोत्साहित किया। लेकिन परिवार में कुछ सदस्य ऐसे भी मौजूद थे, जो नाजिया के ज्यादा पढ़ने के विरुद्ध थे। लेकिन नाजिया ने अपने माता-पिता का विश्वास कभी नहीं तोड़ा। माता-पिता ने कभी भी अपनी बेटी की पढ़ाई रुकने नहीं दी। नाजिया ने हाईस्कूल और 12वीं में 90% से ज्यादा अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार की तरफ से स्कालरशिप भी प्राप्त हुई।

स्कालरशिप की मदद से नाजिया ने कोटा में NEET की तैयारी करने का निर्णय लिया। उन्होंने Allen इंस्टीट्यूट कोचिंग में दाखिला ले लिया। नाजिया ने खूब मेहनत के साथ तैयारी की। वह डॉक्टर बनकर अपने परिवार की हालत सुधारना चाहती थीं। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष किया है।

कोचिंग ने माफ कर दी उनकी फीस

नाजिया को अपने NEET के पहले तीन सालों में असफलता का सामना करना पड़ा। वह कुछ अंकों से ही पीछे रह जाती थीं परंतु उन्होंने हर वर्ष पहले से अधिक नंबर हासिल किए थे। लेकिन उन्हें कॉलेज नहीं मिल रहा था। जब कोचिंग ने उनकी मेहनत और लगन देखी तो 75% फीस कोचिंग के द्वारा माफ कर दी गई। फिर चौथे प्रयास में 22 वर्षीय नाजिया ने NEET परीक्षा 2021 में 668वीं रैंक हासिल कर अपने माता-पिता का नाम रोशन कर दिया। नाजिया अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 477वीं रैंक प्राप्त करने में सफल रहीं।

गांव की पहली डॉक्टर बनेंगी नाजिया

वहीं अब नाजिया को कोई ना कोई कॉलेज मिल गया होगा। नाजिया अपने गांव की एक ऐसी पहली बेटी हैं, जो डॉक्टर बनकर अपने जिले और परिवार का नाम रोशन करने वाली हैं। भले ही उन्होंने अपने जीवन में गरीबी देखी है परंतु उनका हौसला मजबूत था। अपने बुलंद हौसलों के बलबूते उन्होंने अपना सपना साकार किया।

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