अगर आपको भी पसंद है माँसाहारी भोजन तो पढ़े यह कहानी, बदल जायेगा आपका पूरा जीवन!

इस पृथ्वी पर दो तरह के लोग हैं, एक जो साग-सब्जी खाकर अपना जीवन बिता देते हैं और दुसरे जो इसके साथ ही मांस भी खाते हैं। मांस का सेवन मांसहारी जीवों के लिए है ना की इंसानों के लिए। इंसानों की बनावट मांस खाने के हिसाब से नहीं हुई है। जो व्यक्ति मांस का सेवन करता है, उसे जीवन में कई रोगों का भी सामना करना पड़ता है। भारत में तो कम लेकिन विदेशों में मांस का सेवन करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। वहाँ शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मांस का सेवन नहीं करता होगा।

ऐसी कहानी जिसे जानकर आपकी पूरी जिंदगी बदल जाएगी :

आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपकी पूरी जिंदगी बदलने वाली है। बहुत पहले की बात है। एक राजा हुआ करते थे। उसे शिकार का बहुत ज्यादा शौक था। वह जब शिकार के लिए जंगल जाता था तो वहाँ हाहाकार मच जाता था। इससे वन के सभी जीवों में काफी दुःख का माहौल था। उन सभी जीवों के बीच में एक मृदुभाषी मृग भी रहता था। वह वन के जीवों के दुःख को देखकर काफ़ी दुखी था।

वह हमेशा सोचता था कि ईश्वर ने इंसान को खाने के लिए कई चीजें बनाई हैं, फिर वह अपना पेट भरने के लिए क्यों जंगल के निरीह जानवरों का शिकार करते हैं। उसनें राजा के पास जाने का निर्णय लिया। सुबह का समय था। राजा शिकार पर जाने की तैयारी कर रहा था। अचानक से वह मृग राजा के सामने जाकर खड़ा हो गया। मृग ने बड़ी ही सरलता से कहा, ‘हे राजन आप प्रतिदिन जंगल में जाकर जीवों का शिकार करते हैं। साथ ही कुछ जीव आपके हाथी-घोड़ों के निचे आकर कुचल जाते हैं।‘

मेरे शरीर के भीतर कस्तूरी का भण्डार है। वह बहुत ही मूल्यवान है। कृपया आप उसे ले लें और जंगल के जानवरों का शिकार करना छोड़ दें। मृग की बात सुनकर राजा परेशान हो गया और बोला, ‘तुम उन्हें बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देना चाहते हो? तुम यह बात जानते हो कि कस्तूरी लेने के लिए मुझे तुम्हें मारना होगा।‘ राजा की यह बात सुनकर मृग बोला, ‘राजन आप मुझे मारकर कस्तूरी का भंडार ले लीजिये और निर्दोष जीवों को मारना छोड़ दीजिये।‘

राजा ने उस मृग की बात सुनकर उसे आगाह करने की कोशिश की और कहा, तुम्हारा शरीर तो बहुत सुन्दर है। मृग ने राजा का जवाब देते हुए कहा महाराज यह सुन्दर शरीर नश्वर है। मैं दूसरों के प्राण बचाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दूं, इससे अच्छा क्या हो सकता है। मृग की बात सुनकर राजा का मन बदल गया। वह सोचने लगा कि यह जानवर होकर भी दूसरों के लिए मरने की बात कर रहा है और मैं इंसान होकर जीवों का शिकार करता हूँ। उस दिन के बाद से राजा ने जीवों का शिकार करना बंद कर दिया। वह यह बात अच्छी तरह से समझ गया था कि इस नश्वर शरीर की सार्थकता दूसरों की भलाई करने से है।

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